चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं और वहां कार्यरत स्टाफ के लिए एक बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। सालों से सिर्फ फाइलों में धूल फांक रहा नॉर्थ और साउथ कैंपस को जोड़ने वाले अंडरपास का प्रोजेक्ट अब जल्द ही हकीकत में बदलने वाला है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इस अहम प्रोजेक्ट को लेकर सुस्ती छोड़ दी है और इसकी प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इस अंडरपास के बनने से न सिर्फ दोनों कैंपस के बीच की दूरी मिट जाएगी, बल्कि छात्रों को मुख्य सड़क पार करने के भारी जोखिम से भी हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा।
खतरे और भारी जाम से मिलेगी निजात
मौजूदा स्थिति की बात करें तो पीयू का सेक्टर-14 स्थित नॉर्थ कैंपस और सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस एक बहुत ही व्यस्त मुख्य सड़क से बंटे हुए हैं। हर दिन हजारों विद्यार्थियों को एक कैंपस से दूसरे कैंपस जाने के लिए इस ट्रैफिक वाली सड़क को पार करना पड़ता है। चंडीगढ़ प्रशासन के नए प्लान के अनुसार, इन दोनों सेक्टरों को बांटने वाली इसी मुख्य सड़क के नीचे एक भव्य अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पैदल चलने वाले छात्रों के साथ-साथ दोपहिया और चौपहिया वाहन चालक भी सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
गेट नंबर-3 के ट्रैफिक का होगा पक्का इलाज
इस नए अंडरपास के बनने से सबसे बड़ी राहत पीयू के गेट नंबर-3 के बाहर लगने वाले भीषण जाम से मिलेगी। सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान यहां वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे हर किसी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस प्रोजेक्ट के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद कैंपस के अंदर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से स्मूथ हो जाएगी और बाहर की मुख्य सड़क पर ट्रैफिक का दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
15 दिन में तय होगी प्रोजेक्ट की रूपरेखा
चंडीगढ़ प्रशासन ने इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट को रफ्तार देते हुए एक अनुभवी कंसल्टेंट की नियुक्ति कर दी है। इस कंसल्टेंट को अगले पंद्रह दिनों के भीतर अपनी विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट प्रशासन के सुपुर्द करनी होगी। कंसल्टेंट की टीम मुख्य रूप से इस बात की बारीकी से जांच करेगी कि सड़क के नीचे सीवरेज लाइन या बिजली की तारों का नेटवर्क कैसा है और वहां निर्माण कार्य तकनीकी रूप से कितना सुरक्षित रहेगा। जैसे ही यह अहम रिपोर्ट टेबल पर आएगी, अंडरपास का डिजाइन तुरंत फाइनल कर लिया जाएगा और निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

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