जालंधर (अमन बग्गा) लद्देवाली एरिया के पॉश इलाके करोल बाग में डिप्स स्कूल वाली रोड पर गोलगप्पे की रेहड़ी के सामने आखिर किसकी शह पर 2 मंजिला अवैध बिल्डिंग खड़ी कर दी गई? सवाल सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि नगर निगम में बैठे उन भ्रष्ट अधिकारियों का भी है जिनकी आंखों के सामने नियमों का कत्ल होता रहा और वे दफ्तरों में बैठकर AC की ठंडी हवा खाकर तमाशा देखते रहे।

इलाके में चर्चा है कि पेशे से डॉक्टर पति-पत्नी ने रिहायशी इलाके में अवैध तरीके से अस्पताल तैयार कर लिया, लेकिन निगम के जिम्मेदार अधिकारी ऐसे गायब रहे जैसे उन्हें कुछ दिखाई ही नहीं देता। शिकायत हुई लेकिन निगम के भ्रष्ट सिस्टम के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
रिश्वत की ताकत से उड़ी नियमों की धज्जियां?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी विशाल 2 मंजिला बिल्डिंग बिना “सेटिंग” के कैसे खड़ी हो गई?
लोग खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि डॉक्टर दंपति ने निगम अधिकारियों की जेबें गर्म कर दीं और बदले में नियम-कानूनों को कूड़ेदान में फेंक दिया गया। ऊपर से इलाके के लोगों को गुमराह करने के लिए यह ड्रामा किया गया कि “घर” बनाया जा रहा है, जबकि अंदरखाते पूरा अस्पताल तैयार हो रहा था।
यानी जनता की आंखों में धूल झोंको, लाखों का सरकारी रेवेन्यू डकारो और निगम अधिकारियों से सेटिंग कर अवैध बिल्डिंग खड़ी कर लो — क्या मेयर वनीत धीर के राज में अब जालंधर में यही नया सिस्टम चल रहा है?
AAP पार्षद नवदीप कौर और लग्नदीप सिंह आखिर चुप क्यों?
वार्ड नंबर 5 की पार्षद नवदीप कौर और उनके पति आप नेता लग्नदीप सिंह की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। क्या वार्ड की जनता ने उन्हें इसलिए चुना था कि इलाके में अवैध निर्माण माफिया खुलकर कानून की धज्जियां उड़ाए और जनप्रतिनिधि आंखें बंद कर बैठे रहें?
अगर रिहायशी इलाके में अस्पताल खुलेगा तो ट्रैफिक, पार्किंग और लोगों की परेशानियों का जिम्मेदार कौन होगा? जनता या फिर वो नेता जो सबकुछ देखकर भी मौन साधे बैठे हैं?
दुकानों पर चला पीला पंजा, अस्पताल पर क्यों नहीं?

हैरानी की बात देखिए… अस्पताल के साथ वाली गली में बन रही अवैध दुकानों पर कुछ दिन पहले निगम ने पीला पंजा चलाकर डिमोलिशन कर दिया था तो फिर सवाल उठता है कि निगम अधिकारियों को इतनी बड़ी अवैध 2 मंजिला बिल्डिंग दिखाई क्यों नहीं दी? इतना ही नहीं जिन अवैध दुकानों पर पीला पंजा चला था उन दुकानों का निर्माण फिर से शुरू भी हो चुका हैं, आखिर रिहायशी एरिया में दुकानें कैसे बनाई जा सकती हैं और न तो इन दुकानों के आगे कोई पार्किंग छोड़ी गई और न ही नियमों की पालना की गई, फिर किस आधार पर इन दुकानों के निर्माण की मंजूरी दी गई है। इस क पीछे रिश्वत का खेल खेला गया हैं।
इलाके में चर्चा तो यहां तक है कि अवैध अस्पताल पर कार्रवाई रुकवाने के लिए मोटी डील की गई है और यही वजह है कि आज तक कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया गया।
वार्ड नंबर 5 बना भ्रष्टाचार का अड्डा!
जालंधर सेंट्रल हलके का वार्ड नंबर 5 अब भ्रष्टाचार का गढ़ बनता जा रहा है। अवैध कॉलोनियां, अवैध निर्माण और अधिकारियों की संदिग्ध चुप्पी साफ बता रही है कि अंदरखाते बड़ा खेल चल रहा है।
अगर पूरे इलाके की विजिलेंस जांच हो जाए तो करोड़ों रुपये के रेवेन्यू घोटाले और निगम-अवैध निर्माण गठजोड़ की परतें खुल सकती हैं।
मेयर वनीत धीर जवाब दें!
मेयर वनीत धीर बड़े-बड़े दावे करते हैं कि निगम में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि AAP पार्षदों वाले इलाकों में ही अवैध निर्माण धड़ल्ले से हो रहे हैं।
अब सवाल यह है कि:
क्या मेयर इस अवैध अस्पताल को तुरंत सील करवाएंगे?
क्या इस पर पीला पंजा चलेगा?
क्या ATP रविंदर और इंस्पेक्टर मनीष गिल की जांच होगी?
या फिर हमेशा की तरह मामला सेटिंग और रिश्वत के दम पर दबा दिया जाएगा?
अगर कार्रवाई नहीं हुई तो यह साफ हो जाएगा कि जालंधर नगर निगम में कानून नहीं, बल्कि रिश्वत और पहुंच का राज चलता है।








