हरभजन-मित्तल ‘गद्दार’ – “दल-बदलू नेता” मोहिंदर भगत और पवन टीनू ‘वफादार’? दल-बदल पर आम आदमी पार्टी का दोहरा मापदंड क्यों ? AAP की डबल पॉलिटिक्स बेनकाब!
जालंधर (अमन बग्गा) Ashok Mittal, Harbhajan Singh समेत 7 राज्यसभा सांसदों के आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर BJP में शामिल होने के बाद पंजाब में सियासी माहौल गरमा गया है। AAP कार्यकर्ताओं द्वारा इन सांसदों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए इन नेताओं को ‘गद्दार’ कहे जाने के बीच अब राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या दल-बदल के मामले में अलग-अलग पैमाने अपनाए जा रहे हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों और आम लोगों के बीच चर्चा तेज है कि अगर AAP छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने वाले नेता ‘गद्दार’ हैं, तो फिर दूसरी पार्टियों से AAP में शामिल होने वाले नेताओं को क्या कहा जाएगा? गद्दार या वफादार!
जालंधर वेस्ट से विधायक Mohinder Bhagat पहले BJP से जुड़े रहे, बीजेपी की टिकट से विधानसभा चुनाव में 2 बार हार का सामना करना पड़ा और बाद में AAP में शामिल होकर MLA बने और अब पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर हैं। इसी तरह पूर्व विधायक Pawan Kumar Tinu, जो पहले Shiromani Akali Dal (SAD) में थे, चुनाव हारने के बाद अब AAP में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं वह आप के आदमपुर हलका इंचार्ज भी हैं।
ऐसे कई नेता हैं जो कि आज विधायक और सांसद हैं, वही विरोधियों का कहना है कि जब दूसरे दलों के नेता AAP में आते हैं, तो उन्हें “स्वागत योग्य” बताया जाता है, ईमानदार वफादार कहा जाता हैं लेकिन AAP छोड़ने वालों को “गद्दार” कहा जाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारतीय राजनीति में दल-बदल कोई नई बात नहीं है। अक्सर नेता अपनी राजनीतिक संभावनाओं, विचारधारा या परिस्थितियों के अनुसार पार्टी बदलते हैं। लेकिन सवाल तब उठता है जब एक ही कार्रवाई को अलग-अलग नजरिए से देखा जाता है। अगर दल बदलने वाले सासंद हरभजन सिंह अशोक मित्तल समेत सातों सांसदों को आप गद्दार कह रही हैं तो की दल बदलू मोहिंदर भगत और पवन कुमार टीनू जैसे नेता गद्दार क्यों नहीं ??
इस पूरे विवाद के बीच जनता के बीच भी बहस छिड़ गई है—क्या दल बदलना लोकतांत्रिक अधिकार है या फिर इसे नैतिकता के पैमाने पर परखा जाना चाहिए?
फिलहाल, पंजाब की राजनीति में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
AAP Double Standards on Defection: Harbhajan Singh–Ashok Mittal ‘Gaddar’ but Mahendra Bhagat–Pawan Kumar Tinu ‘Vafadar’? Punjab Politics Row Explained