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पंजाब में 3500 पेड़ों की बलि लेकर बनेंगे हाईवे? NHAI की दलीलों पर भड़का हाई कोर्ट, गूगल इमेज देखकर पूछ लिया ऐसा तीखा सवाल

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं (NHAI प्रोजेक्ट्स) के लिए हजारों पेड़ों की कटाई के मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से इस संवेदनशील मामले में विस्तृत जानकारी तलब की है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब जैसे राज्य में, जहां पहले से ही हरियाली (ग्रीन कवर) का नामोनिशान कम होता जा रहा है, वहां एक झटके में 3,495 पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव को कतई हल्के में नहीं लिया जा सकता। सुनवाई के दौरान NHAI के वकील ने अदालत को बताया कि यह कटाई पटियाला बाईपास को फोर-लेन और जीरकपुर बाईपास को सिक्स-लेन बनाने के लिए प्रस्तावित की गई है।

NHAI का दावा- बदले में सौंपे 20 हजार से ज्यादा पेड़ और 7 करोड़ रुपये

प्राधिकरण ने अपने बचाव में अदालत को बताया कि इन प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी जमीन और काटे जाने वाले पेड़ों का पूरा ब्योरा एक अतिरिक्त हलफनामे के जरिए पेश कर दिया गया है, जिसमें साइट की तस्वीरें और गूगल इमेज भी शामिल की गई हैं। NHAI ने दावा किया कि जिन 3,495 पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलनी है, उनकी भरपाई के तौर पर राज्य सरकार को 20,667 पेड़ सौंपे जा चुके हैं। इसके अलावा, क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के लिए लगभग 3.25 हेक्टेयर और 17.57 हेक्टेयर जमीन भी दी गई है। साथ ही, इन प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य सरकार के पास करीब सात करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुआवजा भी जमा करवा दिया गया है।

गूगल इमेज देखकर भड़की अदालत, दावों पर जताई कड़ी असंतुष्टि

NHAI के इन दावों के बावजूद हाई कोर्ट बिल्कुल भी संतुष्ट नजर नहीं आया। अदालत ने खासतौर पर प्राधिकरण द्वारा पेश की गई उस ‘गूगल इमेज’ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जिसमें मुआवजे वाली जमीन को दर्शाया गया था। कोर्ट ने कहा कि इस तस्वीर में दो सड़कें और एक नहर साफ दिखाई दे रही है, जिससे यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि दी गई जमीन का इस्तेमाल नए पेड़ लगाने के लिए आखिर कैसे किया जाएगा। कोर्ट ने प्राधिकरण से यह भी तीखा सवाल पूछा कि जो जमीन वनीकरण के लिए दिखाई जा रही है, क्या वहां पहले भी पेड़ों की कटाई हो चुकी है? अगर ऐसा है, तो उसी पुरानी जमीन को दोबारा मुआवजे के तौर पर कैसे स्वीकार किया जा सकता है।

3-4% ग्रीन कवर वाले पंजाब में 3500 पेड़ कटना छोटी बात नहीं

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह तल्ख टिप्पणी की कि 3,500 पेड़ों का कटना कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। पंजाब में केवल 3-4 प्रतिशत ही हरियाली क्षेत्र बचा है, ऐसे में पर्यावरण के इस नाजुक संतुलन को विकास की आड़ में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। NHAI की तरफ से कोई भी संतोषजनक जवाब न मिलने पर हाई कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अगली सुनवाई में ज्यादा स्पष्ट और विस्तृत गूगल इमेज के साथ जमीन से जुड़ी पूरी और पुख्ता जानकारी पेश करे। अब इस मामले की अगली सुनवाई में ही यह तय होगा कि हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए इन पेड़ों को काटने की अनुमति मिलेगी या पर्यावरण को बचाने के लिए अदालत कुछ बेहद सख्त शर्तें लागू करेगी।

Will Highways in Punjab Be Built at the Cost of 3,500 Trees? High Court Outraged by NHAI’s Arguments