You are currently viewing पंजाब पुलिस का सरेआम बड़ा मजाक! खटारा हुई बिना नंबर वाली सरकारी गाड़ी, तो आरोपियों को ई-रिक्शा में बैठाकर ले गए कोर्ट

पंजाब पुलिस का सरेआम बड़ा मजाक! खटारा हुई बिना नंबर वाली सरकारी गाड़ी, तो आरोपियों को ई-रिक्शा में बैठाकर ले गए कोर्ट

अमृतसर: अमृतसर में आम जनता को ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाने और रोजाना चौराहों पर सैकड़ों चालान काटने वाली पुलिस अब खुद ही सवालों के घेरे में आ गई है। कानून व्यवस्था कायम रखने का दावा करने वाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर उस वक्त एक बड़ा और गंभीर सवालिया निशान लग गया, जब रणजीत एवेन्यू थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया। इस घटना ने पुलिस के तमाम दावों और उनकी जमीनी हकीकत की पोल सरेआम खोलकर रख दी है।

रास्ते में हांफने लगी पुलिस की गाड़ी, नंबर प्लेट भी थी गायब

दरअसल, रणजीत एवेन्यू थाने की पुलिस दो आरोपियों को पेशी के लिए अमृतसर अदालत लेकर जा रही थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि जिस सरकारी पुलिस वाहन में इन आरोपियों को ले जाया जा रहा था, उसकी हालत बेहद खस्ता थी और वह रास्ते में कई जगहों पर खराब होकर हांफने लगी। पुलिस की लापरवाही का आलम यह था कि उस वाहन पर न तो कोई स्पष्ट नंबर प्लेट मौजूद थी और न ही आरोपियों को सुरक्षित ले जाने के लिए कोई पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध ही नजर आ रहे थे।

मीडिया को देख उड़े पुलिस के होश, ई-रिक्शा में ले गए कोर्ट

सड़क पर पुलिस की इस भारी फजीहत और लापरवाही पर जब वहां मौजूद मीडिया कर्मियों ने सवाल उठाने शुरू किए, तो मौके पर अजीबोगरीब और हास्यास्पद स्थिति पैदा हो गई। सवालों से बचने के लिए पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में दोनों आरोपियों को सड़क से गुजर रहे एक आम ई-रिक्शा में बैठाया और उसी में अदालत तक पहुंचाने का फैसला कर लिया। एक तरफ जहां आरोपियों को बिना किसी पुख्ता सुरक्षा के ई-रिक्शा में ले जाया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ पुलिस का वह आधिकारिक सरकारी वाहन बीच सड़क पर लावारिस हालत में ही खड़ा छोड़ दिया गया।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

सरेआम हुई इस घटना ने पुलिस महकमे की सुरक्षा व्यवस्था और उनकी जिम्मेदारी पर कई बड़े प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन कंधों पर कानून का पालन करवाने की जिम्मेदारी है, क्या वे खुद इस तरह खुलेआम नियमों की अनदेखी कर सकते हैं? यदि पुलिस वाहन की हालत इतनी ही खराब थी, तो आरोपियों को ले जाने से पहले उसकी सही तरीके से जांच क्यों नहीं की गई? इसके अलावा क्या ई-रिक्शा में आरोपियों को ले जाकर उनकी और आम जनता की सुरक्षा के साथ कोई बड़ा समझौता नहीं किया गया? फिलहाल यह पूरा मामला शहर में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है और आम जनता पुलिस के आला अधिकारियों से इस लापरवाही पर जवाब मांग रही है।

Punjab Police’s blatant joke! When a government vehicle without a number plate broke down