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BJP के खिलाफ 5 साल तक गरजते रहे दिनेश ढल, AAP ने फेरा मुंह तो आई KD भंडारी की याद! बदला राजनीतिक ठिकाना, जालंधर नॉर्थ में बड़ा सियासी यू-टर्न

जालंधर (अमन बग्गा): जालंधर नॉर्थ की सियासत में ऐसा राजनीतिक मोड़ आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को गर्म कर दिया है। आम आदमी पार्टी के टिकट पर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने और लंबे समय तक भाजपा पर निशाना साधने वाले दिनेश ढल अब खुद भाजपा में शामिल हो गए हैं।

जिस भाजपा को हराने के लिए दिनेश ढल ने 2022 में AAP के टिकट पर जालंधर नॉर्थ से चुनाव लड़ा था और जिस भाजपा के खिलाफ AAP के मंच से लगातार राजनीतिक प्रचार किया, आज उसी भाजपा को उन्होंने अपना नया राजनीतिक ठिकाना बना लिया है।

यही वजह है कि दिनेश ढल का भाजपा में जाना महज पार्टी बदलने की घटना नहीं, बल्कि जालंधर नॉर्थ की सियासत में एक बड़ा राजनीतिक यू-टर्न माना जा रहा है।

2022 में K.D. भंडारी के खिलाफ उतरे थे मैदान में

2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP ने दिनेश ढल को जालंधर नॉर्थ से अपना उम्मीदवार बनाया था। उस चुनाव में भाजपा की ओर से K.D. भंडारी मैदान में थे।

चुनाव परिणामों में दिनेश ढल को 32,685 वोट, जबकि K.D. भंडारी को 37,852 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के बावा हेनरी ने 47,338 वोट हासिल कर चुनाव जीत लिया था।

उस समय दिनेश ढल AAP उम्मीदवार के तौर पर भाजपा को सत्ता से दूर रखने और K.D. भंडारी को चुनावी मुकाबले में हराने के लिए मैदान में थे।

लेकिन सियासत का पहिया ऐसा घूमा कि आज वही दिनेश ढल भाजपा के साथ हैं और K.D. भंडारी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

कल तक ‘विरोध’, आज ‘साथ’—सियासत ने बदला रंग

राजनीति में कहा जाता है कि कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। दिनेश ढल का राजनीतिक सफर इस कहावत का ताजा उदाहरण जरूर बन गया है।

करीब पांच साल पहले AAP के टिकट पर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले दिनेश ढल ने अब भाजपा का दामन थाम लिया है। इस बदलाव ने जालंधर नॉर्थ के राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

आखिर जिस भाजपा के खिलाफ दिनेश ढल ने राजनीतिक लड़ाई लड़ी, उसी भाजपा में जाने की नौबत क्यों आई?

क्या AAP में बदले राजनीतिक समीकरण इसकी वजह बने?

क्या हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी छिनना निर्णायक मोड़ साबित हुआ?

या फिर दिनेश ढल ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई नई रणनीति तैयार की है?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तस्वीर को और साफ कर सकते हैं।

AAP ने जिम्मेदारी छीनी, कुछ दिन बाद दिनेश ढल ने पार्टी ही छोड़ दी

दिनेश ढल के भाजपा में जाने से ठीक पहले AAP ने जालंधर नॉर्थ में संगठनात्मक बदलाव किया था। पार्टी ने दिनेश ढल को हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी से हटाकर जालंधर के मेयर वनीत धीर को नॉर्थ की जिम्मेदारी सौंप दी थी।

इसके कुछ ही दिनों बाद दिनेश ढल का भाजपा में शामिल होना राजनीतिक तौर पर खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सवाल यह भी है कि क्या हलका इंचार्ज पद से हटाया जाना और भाजपा में शामिल होना आपस में जुड़ी हुई घटनाएं हैं या यह महज राजनीतिक संयोग है?

BJP के लिए फायदा या सिर्फ एक बड़ा चेहरा?

दिनेश ढल के भाजपा में शामिल होने के बाद अब असली परीक्षा भाजपा की भी है। नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे दिनेश ढल की क्षेत्र में पहचान और राजनीतिक नेटवर्क है। ऐसे में भाजपा उन्हें किस भूमिका में इस्तेमाल करती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।

वहीं, AAP के लिए भी यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि जिस नेता को पार्टी ने कभी जालंधर नॉर्थ से विधानसभा चुनाव मैदान में उतारा और बाद में हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी दी, वही नेता अब विरोधी खेमे में खड़ा है।

अब सबसे बड़ा सवाल—अगला कदम क्या?

दिनेश ढल का BJP में जाना जालंधर नॉर्थ में सिर्फ आज की खबर नहीं है। इसका असर आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी दिखाई दे सकता है।

कल तक जिस भाजपा के खिलाफ दिनेश ढल वोट मांग रहे थे, अब उसी भाजपा के लिए वोट मांगेंगे। कल तक जिस K.D. भंडारी के खिलाफ चुनावी मैदान में थे, अब उन्हीं के साथ राजनीतिक मंच साझा करेंगे।

यही बदलाव दिनेश ढल के भाजपा में शामिल होने को जालंधर नॉर्थ की सियासत का एक चर्चित राजनीतिक यू-टर्न बना रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा दिनेश ढल को कौन-सी जिम्मेदारी देती है और नॉर्थ की सियासत में उनका यह नया राजनीतिक अध्याय किस करवट बैठता है।

Dinesh Dhall, who railed against the BJP for five years, was reminded of KD Bhandari when AAP turned its back on him