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13 साल की समाजसेवा और युवाओं में मजबूत पकड़… फिर BJP से बाहर क्यों हुए Arvind Sharma? Ashok Sarin के फैसले पर उठ रहे सवाल, सियासी चर्चा तेज

जालंधर (अमन बग्गा): भारतीय जनता पार्टी ने जालंधर में बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए पार्टी नेता अरविंद शर्मा को पार्टी से बाहर कर दिया है। भाजपा के इस एक्शन के बाद जालंधर की सियासत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं व समर्थकों को अपने साथ जोड़ने में जुटे हैं।

अरविंद शर्मा को जालंधर की राजनीति में सक्रिय नेताओं में माना जाता रहा है। खास तौर पर युवा वर्ग के बीच उनकी सक्रियता और जुड़ाव उनकी राजनीतिक ताकत के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में चुनाव के नजदीक पार्टी से उनका बाहर होना भाजपा के स्थानीय संगठन के लिए कितना महत्वपूर्ण या चुनौतीपूर्ण साबित होगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

BJP ने खुद सौंपी थी पंजाब स्तर की जिम्मेदारी

अरविंद शर्मा की संगठनात्मक सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा की ओर से उन्हें पंजाब स्तर पर कन्वीनर की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। जिस नेता को पार्टी ने राज्य स्तर पर जिम्मेदारी दी हो, उसका बाद में पार्टी से बाहर होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बनता है।

अब सवाल यह है कि चुनावी समय में लिए गए इस फैसले का जालंधर में भाजपा के संगठन, कार्यकर्ताओं और खासकर अरविंद शर्मा से जुड़े युवा समर्थकों पर क्या असर पड़ेगा?

हालांकि भाजपा की ओर से लिए गए संगठनात्मक फैसले के पीछे पार्टी का अपना पक्ष और कारण हो सकते हैं, लेकिन राजनीतिक तौर पर इसका असर कितना होगा, इसकी तस्वीर आने वाले दिनों में सामने आएगी।

13 साल की समाजसेवा के लिए पंजाब सरकार से मिल चुका सम्मान

अरविंद शर्मा की पहचान सिर्फ राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रही है। वह पिछले करीब 13 वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं। बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर किए गए सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार की ओर से सम्मान पत्र और गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था।

सम्मान मिलने के बाद अरविंद शर्मा ने पंजाब सरकार, कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत और जालंधर के डिप्टी कमिश्नर का आभार जताया था। उन्होंने कहा था कि यह सम्मान उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन बेटियों को समर्पित है, जिनके सम्मान, अधिकार और बेहतर भविष्य के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

यही वजह है कि राजनीतिक सक्रियता के साथ-साथ उनकी सामाजिक गतिविधियों को भी अब BJP से निष्कासन के राजनीतिक घटनाक्रम के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।

चुनावी मौसम में BJP के फैसले का कितना असर?

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक चुनाव के दौरान किसी सक्रिय नेता को पार्टी से बाहर करने का असर केवल संगठनात्मक स्तर तक सीमित नहीं रहता। यदि संबंधित नेता का अपना समर्थक वर्ग और जमीनी नेटवर्क मजबूत हो, तो उसके राजनीतिक रुख का स्थानीय समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

जालंधर में पहले से ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में अरविंद शर्मा को BJP से बाहर किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है?

दूसरी ओर, यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि अरविंद शर्मा इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्या राजनीतिक रुख अपनाते हैं। क्या वह अपने समर्थकों के साथ कोई नया सियासी रास्ता चुनेंगे या फिलहाल सामाजिक गतिविधियों पर ही फोकस रखेंगे—इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

अब नजर अरविंद शर्मा के अगले कदम पर

फिलहाल BJP से बाहर होने के बाद अरविंद शर्मा के अगले राजनीतिक कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अगर वह अपने समर्थकों और युवा वर्ग के साथ कोई बड़ा फैसला लेते हैं, तो इसका असर जालंधर की राजनीति पर पड़ना स्वाभाविक है।

अब देखना यह होगा कि Ashok Sarin के नेतृत्व में भाजपा का यह फैसला आने वाले चुनावी समीकरणों को कितना प्रभावित करता है और अरविंद शर्मा की अगली सियासी चाल क्या होती है।

13 years of social service and a strong hold among the youth… So why did Arvind Mishra leave the BJP