
चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा में सोमवार को वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके चलते सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। वित्त मंत्री चीमा ने बाजवा पर रेत के खेल के लिए ब्यास नदी के पास ज़मीन खरीदने का आरोप लगाया, तो वहीं बाजवा ने पलटवार करते हुए आबकारी मंत्री पर शराब फैक्ट्रियों से करोड़ों रुपये की मासिक वसूली और शराब नीति में 12,000 करोड़ रुपये के गबन का सनसनीखेज आरोप जड़ दिया।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में प्रताप सिंह बाजवा के ज़मीन खरीद के रिकॉर्ड का खुलासा करते हुए कहा, “बाजवा साहब को पता था कि रेत आने वाली है, इसलिए उन्होंने 2025 में गांव फुल्लड़ा में ब्यास दरिया के साथ धुस्सी बांध के अंदर 16 मरले से ज़्यादा ज़मीन एक किसान से खरीदी।” उन्होंने दूसरा उदाहरण देते हुए कहा कि इसी तरह गांव पासवाल में भी दस एकड़ ज़मीन खरीदी गई, जो धुस्सी बांध के भीतर ही आती है।

चीमा ने आरोप लगाया कि बाजवा की ज़मीन को बचाने के लिए 2017 और 2019 में सरकारी खर्चे पर पत्थर के स्टड लगाए गए, जिस पर 25 लाख की संपत्ति के लिए 1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। उन्होंने कहा, “ये चाहते हैं कि बाजवा की ज़मीन सुरक्षित रहे, आम किसानों की नहीं।”
इन आरोपों के जवाब में प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, “मैंने किसानों से ज़मीन खरीदी, उसका भुगतान किया और सरकार को राजस्व भी भरा।” इसके बाद उन्होंने सीधे वित्त एवं आबकारी मंत्री हरपाल चीमा पर हमला बोलते हुए कहा, “आबकारी मंत्री हर महीने शराब फैक्ट्रियों से पैसे लेते हैं। वह एक डिस्टिलरी से 1.25 करोड़ और हर महीने कुल 35 से 40 करोड़ रुपये इकट्ठा करते हैं।” बाजवा यहीं नहीं रुके, उन्होंने सरकार की शराब नीति पर सवाल उठाते हुए 12,000 करोड़ रुपये के गबन का भी गंभीर आरोप लगाया।
इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों नेताओं में तीखी बहस शुरू हो गई। स्पीकर ने उन्हें शांत करने की कोशिश की, लेकिन जब हंगामा जारी रहा तो सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया।
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Battle in Punjab Assembly




