
जालंधर (अमन बग्गा)- जालंधर के 66 फुटी रोड पर स्थित जालंधर हाइट्स 1 और 2 में गांव फोल्डीवाल और अलीपुर के स्थित पंचायती रास्तों की जमीन का कमर्शियल रेट लेने के लिए गांव के सरपंच के बाद अब DDPO स. इकबाल जीत सिंह ने भी कमर कस ली है।
PLN की टीम ने जब इस पूरे मामले में DDPO स. इकबाल जीत सिंह से बात की तो उन्होंने दो टूक कहा कि गांव फोलड़ीवाल और अलीपुर की पंचायती रास्तों की कीमत कमर्शियल रेट पर ही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्राइज फिक्सेशन कमेटी जमीन का रेट तय करने के लिए जब भी बैठक करेगी तो मैं कमेटी की मीटिंग में यही सिफारिश करूँगा कि पंचायती रास्तों का कमर्शियल रेट ही तय किया जाए। और AGI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के मालिकों से कमर्शियल रेट के आधार पर ही रुपये लिए जाए।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत को कमर्शियल कीमत के हिसाब से जमीन का मुआवजा दिलाने के लिए हम पूरा प्रयास करेंगे।
नगर निगम कमिश्नर जालंधर को लिखेंगे पत्र : DDPO
DDPO ने बताया कि जैसे ही ग्राम पंचायत का केस हल होता है, वह नगर निगम कमिश्नर जालंधर को पत्र लिखेंगे कि वह अलीपुर की जमीन जो उक्त फ्लैट निर्माता कंपनी ने कब्जे अधीन ली हुई है, उस जमीन की कमर्शियल कीमत नगर निगम वसूल करे| उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर किसी भी प्रकार की ढील नहीं बरती जाएगी| उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द ग्राम पंचायत फोलडीवाल को न्याय दिलाया जाएगा|
फोलडीवाल में हाल ही में बिकी 12 करोड रुपये प्रति एकड़ ज़मीन
वही आप को बता दे कि फोलडीवाल में हाल ही में 12 करोड रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ज़मीन बिकने की सूचना है, इस हिसाब से सवा 2 एकड़ जमीन की वैल्यू 25 से 30 करोड़ रुपये बनती है|
DC श्री घनश्याम थोरी से करेंगे मुलाकात
वही जल्द ही इस पूरे मामले को लेकर हमारी टीम DC श्री घनश्याम थोरी से मुलाकात कर यह जानने की कोशिश करेगी कि इस पूरे मामले के बारे में उन की क्या राय है। और कब तक गांव पंचायत को न्याय मिलने की आस है।
पर्दे के पीछे कुछेक सरकारी अधिकारियों के साथ हो सकती सेटिंग
वही आप को बता दे कि सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आ रही है कि पर्दे के पीछे कुछेक सरकारी अधिकारियों के साथ सेटिंग करने की कवायद चल रही है ताकि जमीन के रेट कलेक्ट्रेट रेटों के आधार पर फिक्स करवा कर करोड़ो का फायदा पहुंचाया जा सकें।
हालांकि इस पूरे मामले पर फोलडीवाल गांव के सरपंच सुखा फोलडीवाल पहले ही स्पष्ट कह चुके है कि पंचायती जमीन का मुआवजा कमर्शियल वैल्यू के हिसाब से ली लिया जाएगा ।अगर इस मामले में किसी ने अड़चन डालने की कोशिश की तो वे फ्लैट्स निर्माता कंपनी के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
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