मोहाली: अपनी लंबित मांगों को लेकर चंडीगढ़ बॉर्डर पर डटे पंजाब के किसानों का आंदोलन शुक्रवार को और तेज हो गया। 32 किसान जत्थेबंदियों के साझा मोर्चे के तहत हजारों किसानों ने सड़क के दोनों तरफ पैदल मार्च निकालकर जबर्दस्त शक्ति प्रदर्शन किया। बीते 1 सितंबर से बॉर्डर पर पक्का मोर्चा लगाकर बैठे किसानों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
‘सरकार टस से मस नहीं हुई’, शाम 5 बजे होगा बड़े संघर्ष का ऐलान
किसान नेता हरविंदर सिंह लखोवाल ने सरकार के अड़ियल रवैये पर कड़ा रोष जताया। उन्होंने कहा कि धरने के तीन दिन बीत जाने के बावजूद न तो पंजाब की मान सरकार और न ही केंद्र सरकार के कानों पर जूं रेंगी है। किसान नेताओं ने अल्टीमेटम दिया था कि शुक्रवार दोपहर 2 बजे तक अगर सरकार बातचीत या मांगों के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो शाम 5 बजे के बाद अगले तीखे संघर्ष की रणनीति सार्वजनिक कर दी जाएगी। लखोवाल ने पंजाब भर के किसानों को अगले बड़े मोर्चे के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।
7 सितंबर के बाद भी अनिश्चितकाल तक बढ़ सकता है मोर्चा
फिलहाल किसान संगठनों ने इस पड़ाव की अंतिम तारीख 7 सितंबर तय की थी, लेकिन आंदोलन स्थल पर किसानों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए मोर्चा अनिश्चितकाल के लिए आगे बढ़ने के पूरे आसार बन गए हैं। बॉर्डर पर जुटे हर किसान में सरकार की अनदेखी को लेकर भारी नाराजगी दिखाई दे रही है। किसान नेताओं का दो टूक कहना है कि जब तक सरकार लिखित आश्वासन और ठोस फैसले नहीं लेती, तब तक हाईवे और बॉर्डर खाली करने का सवाल ही नहीं उठता।


Farmers stage a massive show of strength at the Chandigarh border, holding foot marches on both sides




