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चंडीगढ़ के 117 करोड़ के घोटाले में IDFC बैंक का बड़ा दांव, 5.75 करोड़ का ‘फुल एंड फाइनल’ सेटलमेंट ऑफर; नगर निगम का दावा किया खारिज

चंडीगढ़: चंडीगढ़ के सबसे बड़े वित्तीय घोटाले यानी चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) और नगर निगम (MCC) के कथित ₹117 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। मामले में घिरे IDFC फर्स्ट बैंक ने नगर निगम के मुख्य लेखा अधिकारी (CAO) को पत्र लिखकर ₹5.75 करोड़ के ‘फुल एंड फाइनल’ सेटलमेंट की पेशकश की है। बैंक ने इस राशि को 3.49 करोड़ रुपये के ब्याज सहित नगर निगम के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) खाते में आरटीजीएस (RTGS) के जरिए ट्रांसफर भी कर दिया है। इसके साथ ही बैंक ने निगम द्वारा स्पेशल ऑडिट ऑब्जर्वेशन के आधार पर किए गए भारी-भरकम रिकवरी के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

निगम की गणना गलत, ₹94.20 करोड़ के लेन-देन को किया नजरअंदाज: बैंक
‘द ट्रिब्यून’ द्वारा हासिल आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, बैंक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि नगर निगम की ओर से तैयार की गई ₹108.73 करोड़ की रिकवरी शीट त्रुटिपूर्ण है। बैंक का दावा है कि महालेखाकार (AG) की जिस ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर निगम दावा कर रहा है, उसमें करीब ₹94.20 करोड़ के अहम लेन-देन को शामिल ही नहीं किया गया। बैंक के विस्तृत रीकंसिलेशन आंकड़ों के मुताबिक, यदि सभी पुराने क्रेडिट और अनधिकृत डेबिट का सही हिसाब लगाया जाए, तो बैंक की देनदारी केवल ₹5.75 करोड़ ही शेष बचती है। बैंक ने यह भी साफ किया कि इस भुगतान को किसी भी रूप में अपराध या देनदारी की कानूनी स्वीकारोक्ति न माना जाए।

अब तक ₹126.89 करोड़ चुकाने का दावा, जटिल मनी ट्रेल का खुलासा
बैंक का कहना है कि फरवरी 2026 में घोटाला उजागर होते ही उसने एफडी एडवाइस के आधार पर 25 फरवरी को ₹111 करोड़ से अधिक का मूलधन और ₹9.30 करोड़ से अधिक का ब्याज (कुल ₹121.14 करोड़) निगम को लौटा दिया था। अब ₹5.75 करोड़ के नए भुगतान के साथ बैंक द्वारा निगम को दी गई कुल रकम लगभग ₹126.89 करोड़ पहुंच गई है। बैंक ने जो आंकड़े रखे हैं, उससे पैसों के हेरफेर की बेहद उलझी हुई तस्वीर सामने आई है। इसमें मुखौटा कंपनी ‘कैपको फिनटेक’ से CSCL खातों में वापस आए ₹46.26 करोड़ और ₹8.10 करोड़, एसबीआई खाते में ट्रांसफर हुए ₹12.07 करोड़ तथा हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के खाते से गलत तरीके से निगम के खाते में पहुंचे ₹25.28 करोड़ का पेचीदा हिसाब शामिल है।

सीबीआई के रडार पर कई बड़े चेहरे, प्रशासक कटारिया बोले- ‘एक-एक पाई वसूलेंगे’
यह पूरा फर्जीवाड़ा अगस्त 2024 में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा में बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के खोले गए एक गुप्त खाते के जरिए रचा गया था। इसमें फर्जी एफडीआर नंबरों का इस्तेमाल कर ₹116.84 करोड़ की 11 जाली फिक्स्ड डिपॉजिट तैयार की गई थीं। जब फरवरी 2026 में निगम ने एफडी भुनाने की कोशिश की, तब इस महाघोटाले की कलई खुली। केंद्र सरकार के निर्देश पर इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। एजेंसी अब तक पूर्व सीएफओ नलिनी मलिक, मुख्य आरोपी व पूर्व बैंक मैनेजर रिभव ऋषि समेत कई बैंककर्मियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने दोहराया है कि जनता के पैसे की पाई-पाई वसूली जाएगी और चाहे कोई कितने भी ऊंचे पद पर हो, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

IDFC Bank makes a major move in the ₹117 crore Chandigarh scam with a ‘full and final’ settlement offer of ₹5.75 crore