चंडीगढ़: पंजाब के करीब 7.50 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ गहराते टकराव के बीच मान सरकार ने गुरुवार को स्थिति संभालने के लिए बड़ा दांव चला है। सरकार ने तीन वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों- वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, उद्योग एवं नवीन ऊर्जा मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर को कर्मचारियों से संवाद स्थापित करने के लिए आगे किया। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्रियों ने जहां एक ओर कर्मचारियों के साथ मेज पर बैठकर मसले सुलझाने की पेशकश की, वहीं दूसरी ओर वेतन, महंगाई भत्ते (DA) और बकाए के भुगतान पर सरकार के रिकॉर्ड का पुरजोर बचाव करते हुए हड़ताल के रास्ते पर चल रहे कर्मचारियों को सख्त संदेश भी दिया।
8 सितंबर को दूसरी सामूहिक छुट्टी का ऐलान, सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा मामला
कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच यह तकरार उस वक्त तेज हुई है जब 27 अगस्त को कर्मचारियों ने लंबित डीए बकाए की मांग को लेकर सामूहिक आकस्मिक अवकाश (Mass Casual Leave) लिया था, जिसके जवाब में सरकार ने गैर-हाजिर रहने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। अब कर्मचारियों ने 8 सितंबर को दोबारा सामूहिक अवकाश पर जाने की घोषणा कर रखी है। वहीं, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए बकाए जारी करने के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) भी दाखिल कर चुकी है। ऐसे नाजुक मोड़ पर सरकार ने 10 प्रमुख कर्मचारी यूनियनों के साथ वार्ता का दौर शुरू करने की पहल की है।
रेवेन्यू का 51% हिस्सा वेतन-पेंशन पर खर्च, देश में सबसे अधिक: हरपाल चीमा
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आंकड़ों के जरिए सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि पंजाब अपने कुल राजस्व का 51 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ वेतन और पेंशन पर खर्च कर रहा है, जो कि 38 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत के मुकाबले पूरे देश में सबसे ज्यादा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब का अपना कर राजस्व राष्ट्रीय औसत से काफी कम होने के बावजूद सरकार कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं कर रही है। चीमा के मुताबिक, साल 2022 से अब तक तीन किस्तों में डीए में 14 फीसदी की बढ़ोतरी की जा चुकी है, जिसके तहत डीए 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत तक पहुंचाया गया है।
14,191 करोड़ का बकाया पिछली सरकारों का पाप, 4,500 करोड़ का हो चुका भुगतान
वित्त मंत्री ने विरोधियों पर पलटवार करते हुए कहा कि डीए बकाए की 14,191 करोड़ रुपये की भारी देनदारी मौजूदा सरकार ने पैदा नहीं की, बल्कि यह पिछली अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकारों से विरासत में मिली है। उन्होंने दावा किया कि किसी भी पूर्ववर्ती सरकार ने इस बकाए को चुकाने की प्रतिबद्धता तक नहीं दिखाई थी, जबकि मान सरकार ने इसके भुगतान की कार्ययोजना अदालत में पेश की और अब तक विरासत में मिली इस देनदारी में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि कर्मचारियों और पेंशनरों को जारी की जा चुकी है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि हरियाणा और गुजरात जैसे भाजपा शासित राज्यों में केंद्र के समान डीए न दिए जाने पर सवाल क्यों नहीं उठाए जाते, जबकि हरियाणा में कर्मचारियों को पंजाब के मुकाबले लगभग 13 प्रतिशत कम वेतन मिलता है।
हड़ताल और बातचीत एक साथ मुमकिन नहीं, विपक्ष पर भड़काने का आरोप
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों और पेंशनरों को सरकार की ‘रीढ़ की हड्डी’ बताते हुए अपील की कि वे विपक्षी दलों के राजनीतिक औजार न बनें। उन्होंने कहा कि अपेक्षित स्तर पर डीए देने से सरकार के खजाने पर सालाना करीब 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिसका उपयोग स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे के विकास में किया जा सकता है। वहीं, सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने साफ किया कि 2021 में तय नियमों के अनुसार राज्य सरकार के लिए केंद्र के समान डीए देना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। वित्त मंत्री ने दो टूक शब्दों में मुख्यमंत्री भगवंत मान का रुख दोहराया कि कर्मचारी एक साथ हड़ताल पर जाने और बातचीत की टेबल पर बैठने की दोहरी नीति नहीं अपना सकते, और गैर-कानूनी अनुपस्थिति पर कानून सम्मत कार्रवाई जारी रहेगी।


Amidst a standoff with 7.50 lakh employees and pensioners in Punjab, the Mann government makes a major move




