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ट्रिब्यूनल ने खारिज कीं शरण की सभी 40 अर्जियां, न्यूजीलैंड में खालिस्तानी समर्थकों को बड़ा झटका

वेलिंगटन: न्यूजीलैंड के इमिग्रेशन एंड प्रोटेक्शन ट्रिब्यूनल ने खालिस्तान से जुड़े मामलों में शरण (Asylum) मांगने वाले भारतीय नागरिकों को जोरदार झटका दिया है। ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2025 और 2026 में सामने आए ऐसे सभी 40 प्रकाशित मामलों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 2025 के 15 और 2026 के अब तक के 25 मामलों में से किसी भी आवेदक को शरणार्थी का दर्जा नहीं दिया गया।

2024 के फैसलों के आधार पर राहत की उम्मीद पड़ी फीकी
‘आवाज’ और ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ की हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रिब्यूनल के रुख में यह बड़ा बदलाव साल 2024 के दो ऐतिहासिक मामलों के बाद आया है। वर्ष 2024 में ट्रिब्यूनल ने दो भारतीय नागरिकों को इस आधार पर शरणार्थी का दर्जा दिया था कि उनके हाई-प्रोफाइल खालिस्तान समर्थक सोशल मीडिया कैंपेन, अलगाववादी संगठनों से गहरे जुड़ाव और टैटू आदि के चलते भारत लौटने पर उनके उत्पीड़न की वास्तविक आशंका थी। इसके बाद वकीलों ने कम से कम 9 अन्य मामलों में 2024 के उन्हीं फैसलों की नजीर पेश की, लेकिन ट्रिब्यूनल ने उनकी दलीलें ठुकरा दीं।

‘सिर्फ जनमत संग्रह में वोट या प्रदर्शन करना खतरे का सबूत नहीं’
ट्रिब्यूनल ने अपने विस्तृत फैसलों में पाया कि बाद में शरण मांगने वाले आवेदकों की राजनीतिक गतिविधियां बेहद निचले स्तर (Low-profile) की थीं। ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं मिले कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां या प्रशासन उनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। एक मामले का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल ने बताया कि एक आवेदक ने ऑकलैंड में गैर-बाध्यकारी खालिस्तान जनमत संग्रह में वोट डाला था और वेलिंगटन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। ट्रिब्यूनल ने इसे सामान्य स्तर की गतिविधि मानते हुए स्पष्ट किया कि सिर्फ खालिस्तान का समर्थन करना शरण पाने का आधार नहीं हो सकता।

व्यक्तिगत खतरे का ठोस प्रमाण देना अनिवार्य
ट्रिब्यूनल के फैसलों से यह साफ हो चुका है कि न्यूजीलैंड में शरणार्थी का दर्जा पाने के लिए आवेदकों को अपने ऊपर भारत में होने वाले वास्तविक, व्यक्तिगत और गंभीर उत्पीड़न के खतरे को पुख्ता सबूतों के साथ साबित करना होगा। इमिग्रेशन न्यूजीलैंड (INZ) के प्रवक्ता के अनुसार, विभाग शरण संबंधी आंकड़ों को विशिष्ट आधारों के तहत अलग से जारी नहीं करता, लेकिन प्रकाशित न्यायिक फैसलों का पैटर्न स्पष्ट करता है कि बिना ठोस आधार वाली राजनीतिक शरण की अर्जियों को अब तुरंत खारिज किया जा रहा है।

Tribunal rejects all 40 asylum applications; major setback for Khalistani supporters in New Zealand