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BJP-SAD गठबंधन फाइनल: बीजेपी बनेगी बड़ा भाई, 70+40 के संभावित फॉर्मूले ने बढ़ाई हलचल; 2024 लोकसभा का प्रदर्शन बना रही आधार

चंडीगढ़ (अमन बग्गा): पंजाब की राजनीति में कभी एक-दूसरे के भरोसेमंद सहयोगी रहे भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर साथ आने की दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं। हालांकि दोनों दलों की ओर से अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन भरोसेमंद न्यूज एजेंसी ANI के दावे ने पंजाब की राजनीति में बड़ी हलचल मचा दी हैं। ANI के मुताबिक दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी है और इस बार BJP गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में आना चाह रही है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस गठबंधन में कभी अकाली दल ‘बड़े भाई’ की भूमिका में था, उसमें अब BJP समीकरण अपने पक्ष में बदलने की कोशिश कर रही है। मीडिया रिपोर्टों में 70 बीजेपी + 40 अकालीदल के संभावित सीट फॉर्मूले की चर्चाए है। हालांकि इस फार्मूले पर अकालीदल के मानने की उम्मीद बेहद ना के बराबर मानी जा रही हैं । लेकिन सूत्रों की बात करे तो दोनों पार्टियों का गठबंधन होने की पूरी उम्मीद हैं बस जल्दी ही औपचारिक एलान हो सकता हैं। वही इसे अभी अंतिम और आधिकारिक सीट बंटवारा नहीं माना जा सकता।

बड़े भाई की भूमिका में आने के दावे की असली वजह क्या है?

BJP के ज्यादा सीटों पर दावा करने के पीछे सिर्फ संगठनात्मक विस्तार नहीं, बल्कि 2024 लोकसभा चुनाव का बढ़िया प्रदर्शन भी एक बड़ा आधार माना जा रहा है। 2024 में BJP पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर अकेले मैदान में उतरी थी। पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी, लेकिन उसका वोट शेयर बढ़कर 18.56% हो गया, जो 2019 के मुकाबले लगभग दोगुना। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह रही कि लोकसभा चुनाव के नतीजों को विधानसभा क्षेत्रों में तोड़कर देखने पर BJP 23 विधानसभा हलकों में सबसे आगे मतलब नंबर एक पर रही और दस सीटों पर दूसरे नंबर पर रही, वही इसके मुकाबले SAD 9 विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर था।

यही आंकड़ा BJP को यह कहने का आधार देता है कि पंजाब में उसकी राजनीतिक ताकत अब केवल कुछ शहरी सीटों तक सीमित नहीं रही। पार्टी ने अलग चुनाव लड़कर अपना वोट आधार बढ़ाया है और अब गठबंधन में उसी अनुपात में ज्यादा सीटों की हिस्सेदारी चाहती है।

लेकिन एक सवाल BJP के सामने भी है

2024 का आंकड़ा BJP के पक्ष में जरूर जाता है, लेकिन इसकी दूसरी तस्वीर भी है। 18.56% वोट हासिल करने के बावजूद BJP एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई। यानी वोट शेयर बढ़ना और उसे विधानसभा सीटों में बदलना अभी BJP के लिए चुनौती है। दूसरी तरफ SAD का वोट शेयर 13.42% रहा और पार्टी ने Bathinda लोकसभा सीट जीती। इसलिए संभावित गठबंधन में असली सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि किसके पास कितना वोट प्रतिशत है। सवाल यह भी होगा कि किस पार्टी के पास किस क्षेत्र में मजबूत उम्मीदवार, संगठन और ट्रांसफर होने वाला वोट बैंक है।

बीजेपी नेताओं को निर्देश: 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात पर रखें फोकस

रिपोर्ट के मुताबिक BJP ने सभी नेताओं को यही निर्देश दिए हैं कि मीडिया में इसी बात को दोहराया जाए कि बीजेपी पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी इस की यह भी वजह हो सकती हैं कि बीजेपी अकालीदल पर दवाब बनाना चाह रही हो। राजनीतिक तौर पर इसका एक अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि BJP बातचीत की मेज पर खुद को मजबूत स्थिति में रखना चाहती है।

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