
जालंधर: जालंधर शहर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की अब खैर नहीं। आज से शहर में हाई-टेक कैमरों की मदद से ई-चालान काटने की व्यवस्था शुरू होने जा रही है, जिसका उद्घाटन डीजीपी गौरव यादव कर सकते हैं। इस नई प्रणाली के तहत 1150 सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है, जो नियम तोड़ने वाले वाहन की नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन कर चालान सीधे घर भेज देगा।
13 प्रमुख चौकों से होगी ट्रायल की शुरुआत
ट्रैफिक पुलिस ने फिलहाल शहर के 13 प्रमुख पॉइंट्स पर इस सिस्टम का ट्रायल शुरू करने की योजना बनाई है। इस दौरान सिस्टम की कार्यप्रणाली और संभावित खामियों की जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, कंट्रोल रूम के सफल निरीक्षण के बाद ही इसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा। जिन 13 पॉइंट्स पर ट्रायल शुरू हो सकता है उनमें पीएपी, बीएसएफ, बीएमसी, गुरु नानक मिशन चौक, गुरु रविदास चौक, फुटबॉल चौक, कपूरथला चौक, भगवान वाल्मीकि चौक, गुरु अमरदास चौक, वर्कशाप चौक, डॉ. बीआर अंबेडकर चौक, मॉडल टाउन और चुनमुन चौक शामिल हैं।

तैयारियों पर सवाल: कहीं कैमरे खराब, तो कहीं लाइट बंद
हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। शहर के सबसे व्यस्त बीएमसी चौक पर तैयारियों के नाम पर सिर्फ जेब्रा क्रॉसिंग ही बनाई गई है। स्थानीय लोगों और कुछ पुलिसकर्मियों ने बताया कि जिन चौकों पर ई-चालान शुरू करने की बात हो रही है, उनमें से कई जगहों पर या तो कैमरे काम नहीं कर रहे हैं या फिर ट्रैफिक लाइटें बंद पड़ी हैं। पुलिस द्वारा जागरूकता के लिए बनवाए जा रहे फ्लैक्स बोर्ड भी अभी तक प्रमुख चौकों पर नहीं लगाए गए हैं।
कैसे काम करेगा यह हाई-टेक सिस्टम?
यह पूरी हाई-टेक व्यवस्था शहर के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से संचालित होगी, जो ट्रैफिक प्रबंधन के साथ-साथ अपराध पर भी लगाम लगाएगी। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर यह सिस्टम स्वतः काम करेगा; जैसे ही कोई ड्राइवर रेड लाइट जंप करेगा या जेब्रा क्रॉसिंग पार करेगा, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक वाले कैमरे तुरंत वाहन की नंबर प्लेट को रीड करके चालान जनरेट कर देंगे। इसके साथ ही, शहर में लगे 1150 कैमरों में फेस रिकग्निशन, स्पीड डोम और जूम जैसे एडवांस फीचर भी हैं, जो किसी भी अपराधी या संदिग्ध व्यक्ति के सामने आने पर सीधे कंट्रोल रूम में अलर्ट भेजेंगे, जिससे पुलिस को तत्काल कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
77 करोड़ का प्रोजेक्ट
लगभग 77 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से ट्रैफिक व्यवस्था में पारदर्शिता आने और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित होने की उम्मीद है। अगर यह सिस्टम सफल होता है, तो यह न केवल ट्रैफिक प्रबंधन को सुधारेगा, बल्कि आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने में भी मददगार साबित होगा और जालंधर को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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no mercy for those who break traffic rules




