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चंडीगढ़ में मलबे पर संसद में क्यों छिड़ी बहस? जानिए C&D वेस्ट के नियम, कलेक्शन सेंटर और निपटारे की पूरी सच्चाई

चंडीगढ़: देश के सबसे खूबसूरत और नियोजित शहरों में शुमार चंडीगढ़ अब मलबे के ढेर और उसके निपटारे को लेकर संसद की सुर्खियों में आ गया है। शहर से हर साल निकलने वाले हजारों टन निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C&D) मलबे को लेकर संसद में जोरदार बहस छिड़ गई। जहां केंद्र सरकार ने कागजों और आंकड़ों का हवाला देते हुए शहर में मलबे के प्रबंधन को पूरी तरह दुरुस्त और क्षमता से बेहतर बताया, वहीं स्थानीय सांसद मनीष तिवारी ने इन दावों को कटघरे में खड़ा करते हुए जमीनी सच्चाई को बिल्कुल विपरीत करार दिया है।

सांसद मनीष तिवारी ने संसद में उठाए सवाल

लोकसभा में चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने शहर में बढ़ रही मलबे की समस्या को गंभीरता से उठाते हुए केंद्र सरकार से कई अहम जवाब मांगे। उन्होंने पूछा कि क्या चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम ने मलबे के निपटारे के लिए प्रस्तावित 17 नए स्थलों को वास्तव में स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने शहर में सालाना उत्पन्न होने वाले मलबे की कुल मात्रा और उसकी वैज्ञानिक प्रोसेसिंग क्षमता का सटीक ब्योरा मांगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मलबा खाली प्लॉटों और सड़कों के किनारे क्यों जमा हो रहा है।

केंद्र का लिखित जवाब, क्षमता से तीन गुना कम निकलता है कचरा

सांसद के सवालों का उत्तर देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में विस्तृत आंकड़े पेश किए। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में हर साल करीब 13,285 मीट्रिक टन मलबा (C&D वेस्ट) निकलता है, जबकि इसके सुरक्षित प्रसंस्करण की वार्षिक क्षमता 45,000 मीट्रिक टन है, जो उत्पादन से लगभग तीन गुना अधिक है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि शहर में मलबे के सुरक्षित संग्रह के लिए 23 अधिकृत स्थल काम कर रहे हैं और नगर निगम ने पर्याप्त टिपर व लोडर तैनात किए हैं, जिससे शहर में कहीं भी अवैध डंपिंग नहीं हो रही है।

क्या होता है C&D मलबा और क्यों जरूरी है वैज्ञानिक निपटारा?

निर्माण एवं ध्वस्तीकरण मलबा यानी C&D वेस्ट किसी भी भवन, सड़क या ढांचे के निर्माण, टूट-फूट या पुनर्निर्माण के दौरान निकलता है। इसमें ईंट, सीमेंट, कंक्रीट, पत्थर, मिट्टी, प्लास्टर, टाइल्स, लोहा और कांच जैसी सामग्रियां शामिल होती हैं। सामान्य घरेलू कचरे के विपरीत, यह मलबा खुद-ब-खुद नष्ट नहीं होता। यदि इसे सही समय पर न उठाया जाए, तो यह हवा में धूल कण बढ़ाकर प्रदूषण फैलाता है और सड़कों व सार्वजनिक स्थानों पर यातायात को बाधित करता है। इसलिए इसका वैज्ञानिक पुनर्चक्रण अनिवार्य माना जाता है।

शहर में कहां-कहां जमा कर सकते हैं निर्माण मलबा?

नगर निगम के अनुसार, शहरवासियों की सुविधा के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में 23 अधिकृत मलबे के कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। इनमें सेक्टर 9-सी, 16-डी, 23-डी, 25 वेस्ट, 26, 31-बी, 38 वेस्ट, 45-डी, 47-डी, 48-सी, 51, 56-ए, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 व फेज-2, मलोया, रामदरबार कॉलोनी, मनीमाजरा के विभिन्न स्थान तथा सेक्टर-18 और सेक्टर-37-सी में एसएसके के पास स्थित स्थल शामिल हैं। शहर के नागरिक अपने घरों से निकलने वाले मलबे को इन तय स्थानों पर डाल सकते हैं, जहां से उसे सीधे प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाता है।

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