नई दिल्ली: पाकिस्तान स्थित सिखों के पवित्र तीर्थस्थल गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। करतारपुर साहिब कॉरिडोर को फिर से खोलने की उठ रही मांगों के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में अपना रुख एकदम साफ कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों और भारत-पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए फिलहाल इस बहुप्रतीक्षित कॉरिडोर को दोबारा खोलना संभव नहीं है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद से बंद है रास्ता
लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य हमें इस बात के लिए विवश करता है कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर को फिलहाल बंद ही रखा जाए। गौरतलब है कि साल 2025 में हुए खौफनाक पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में आई भारी खटास के चलते 7 मई 2025 को इस वीजा-मुक्त कॉरिडोर को बंद कर दिया गया था। यह कॉरिडोर पंजाब के डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोड़ता है।
सिख संगठनों की मांगों पर भारी पड़ी सुरक्षा चिंताएं
विदेश राज्य मंत्री ने सदन में इस बात को भी स्वीकार किया कि सरकार को कई सिख धार्मिक समूहों और संगठनों की ओर से कॉरिडोर को जल्द खोलने के लिए लगातार ज्ञापन और मांगें मिल रही हैं। सिख समुदाय के लिए इस पवित्र स्थल का असीम धार्मिक महत्व है, लेकिन सरकार ने यह साफ संकेत दिया है कि आम नागरिकों और देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, जिसके साथ किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
2019 में शुरू हुआ था ऐतिहासिक सफर, 2024 में बढ़ा था समझौता
इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने याद दिलाया कि भारतीय तीर्थयात्रियों को वीजा-मुक्त दर्शन की सुविधा देने के लिए 24 अक्टूबर 2019 को भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक करतारपुर कॉरिडोर समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही इस मांग को गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व से ठीक पहले पूरा किया गया था। खास बात यह है कि पिछले ही साल, अक्टूबर 2024 में इस समझौते को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाया भी गया था।
खुलने की कोई समय-सीमा तय नहीं, सुधरने होंगे हालात
सरकार ने कॉरिडोर को दोबारा खोलने की कोई निश्चित तारीख या समय-सीमा नहीं बताई है। साथ ही, इस मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ किसी नई कूटनीतिक बातचीत के भी कोई संकेत नहीं दिए गए हैं। इससे साफ है कि तीर्थयात्रा की बहाली पूरी तरह से सुरक्षा माहौल में सुधार पर ही निर्भर करेगी। बता दें कि पिछले साल कॉरिडोर बंद होने के बावजूद, सरकार ने 1974 के भारत-पाकिस्तान धार्मिक तीर्थयात्रा प्रोटोकॉल के तहत गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर सिख जत्थों को कड़ी सुरक्षा जांच के बाद पाकिस्तान जाने की अनुमति दी थी। यह प्रक्रिया मौजूदा वीजा-मुक्त रास्ते से बिल्कुल अलग और सख्त थी।


Major setback for pilgrims visiting Kartarpur Sahib; government explains in Lok Sabha








