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जिसे 23 साल से मरा समझ रही थी मां, वह बॉर्डर पर जंजीरों में बंधा मिला; रुला देगी मां-बेटे के मिलन की ये कहानी

पटियाला: कल्पना कीजिए उस मां के दिल की हालत, जिसने 23 सालों तक अपने जिस कलेजे के टुकड़े को मरा हुआ मानकर उसके लौटने की सारी उम्मीदें छोड़ दी हों, वो अचानक एक दिन जिंदा उसके सामने आ जाए। तमिलनाडु की रहने वाली सुंदरी के साथ बिल्कुल ऐसा ही एक दैवीय चमत्कार हुआ है। 23 साल पहले घर से भागा उनका बेटा प्रकाश (प्रकासम) उन्हें वापस मिल गया है। जब इतने सालों बाद मां ने अपने खोए हुए बेटे को कसकर गले लगाया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक उठीं। एक पत्रकार, एक एनजीओ, दो जिला उपायुक्तों (डीसी) की मेहनत और एक मां की अटूट ममता ने सैकड़ों किलोमीटर दूर इस नामुमकिन से लगने वाले मिलन को मुमकिन कर दिखाया है। हालांकि, इन 23 सालों में प्रकाश ने जो अमानवीय यातनाएं झेलीं, वह किसी की भी रूह कंपाने के लिए काफी है।

18 साल तक जानवरों के साथ सोया, पैरों में पड़ी रहीं जंजीरें

सुंदरी का बेटा प्रकाश साल 2003 में परिवार के साथ हुई एक छोटी सी अनबन के बाद घर छोड़कर चला गया था। कुछ महीनों बाद उसने फोन कर बताया था कि वह चेन्नई में है, लेकिन उसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिला। थक-हारकर परिवार ने उसे मृत मान लिया था। लेकिन हकीकत में प्रकाश भारत-पाकिस्तान सीमा के पास अजनाला (पंजाब) के एक गांव में बंधुआ मजदूर के तौर पर नर्क की जिंदगी जी रहा था। 18 सालों से अधिक समय तक उसे रात में जंजीरों से बांधकर रखा गया। उसे जानवरों के साथ सुलाया जाता और मवेशियों की देखभाल करने के एवज में सिर्फ दो वक्त का खाना दिया जाता था। इस खौफनाक और अमानवीय जिंदगी ने प्रकाश का मानसिक संतुलन पूरी तरह से बिगाड़ दिया था।

NGO और एक पत्रकार ने मसीहा बनकर बचाई जान

प्रकाश की जिंदगी में उम्मीद की नई किरण जुलाई 2022 में आई, जब ‘अपना फर्ज सेवा सोसायटी’ नाम के एक एनजीओ ने उसे बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया। उसे पटियाला के लचकाणी गांव स्थित शेल्टर होम लाया गया। बेहद खराब मानसिक स्थिति के कारण उसके इलाज में लंबा वक्त लगा। धीरे-धीरे जब उसकी हालत में सुधार हुआ तो भाषा की दीवार आड़े आई, लेकिन इतना पता चल गया कि वह तमिल बोलता है। इसके बाद एनजीओ के स्वयंसेवकों ने तमिलनाडु के तिरुपुर जिले के रहने वाले पत्रकार मुथैया से संपर्क किया। किस्मत का खेल देखिए कि 1 जुलाई को पत्रकार मुथैया ने प्रकाश की मां सुंदरी को अपने गांव से महज 25 किलोमीटर दूर खोज निकाला और उन्हें बेटे के जिंदा होने की वो खुशखबरी दी, जिस पर उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था।

‘मरने से पहले मेरे बेटे ने मुझे गले लगाने के लिए दूसरा जन्म लिया’

बेटे के जिंदा होने की खबर मिलते ही सुंदरी ने तुरंत कोयंबटूर के जिला कलेक्टर पवन कुमार जी. किरियप्पनवर से मदद मांगी। मां की तड़प को समझते हुए प्रशासन ने पटियाला के डिप्टी कमिश्नर और एनजीओ के साथ मिलकर कागजी कार्रवाई पूरी करवाई। आखिरकार 27 जुलाई को सुंदरी, उनका दूसरा बेटा प्रभु और पत्रकार मुथैया पटियाला के लचकाणी पहुंचे। चंडीगढ़ तमिल संगम और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में जब सालों बाद मां-बेटे का मिलन हुआ, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। बेटे को सीने से लगाकर रोते हुए सुंदरी ने भर्राई आवाज में कहा, “इस दुनिया को अलविदा कहने से पहले मुझे मेरे बेटे के दर्शन हो गए। यह किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं है, ऐसा लग रहा है जैसे मुझे गले लगाने के लिए मेरे बेटे ने दूसरा जन्म लिया है।” 

The son his mother had believed dead for 23 years was found chained at the border