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पाकिस्तानी ड्रोन्स का काल बनेगा पंजाब पुलिस का ‘हवाई नाका’, करोड़ों की इस तकनीक से कांपेंगे तस्कर

चंडीगढ़: सरहद पार से मौत और नशे का सामान भेजने वाले पाकिस्तान की अब एक नहीं चलने वाली है। आसमान के रास्ते ड्रग्स और हथियारों की तस्करी करने वाले पाकिस्तानी ड्रोन्स के पर कतरने के लिए पंजाब पुलिस ने एक अभेद्य चक्रव्यूह रच दिया है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) की रक्षा पंक्ति के साथ-साथ अब राज्य पुलिस ने अपना दूसरा और बेहद मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार कर लिया है, जिसे ‘हवाई नाका’ का नाम दिया गया है। यह अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम न सिर्फ दुश्मन की हर हरकत को रडार पर लेगा, बल्कि भारतीय सीमा में घुसने की जुर्रत करने वाले हर ड्रोन को हवा में ही मार गिराएगा।

क्या है ‘हवाई नाका’ और कहां बिछाया गया है यह जाल?

पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव के अनुसार, ‘हवाई नाका’ दरअसल भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हवाई दबदबे और ताकत को दर्शाने वाला एक नया शब्द है। इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत करीब 53 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तीन अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए गए हैं। खुफिया जानकारी और हालिया ड्रोन गतिविधियों के पैटर्न को देखते हुए इनमें से दो सिस्टम तरनतारन और एक अमृतसर देहाती में लगाया गया है। बीएसएफ, सेना और खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर तैयार किया गया यह मजबूत सिस्टम फिरोजपुर, तरनतारन और अमृतसर देहाती के लगभग 210 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह अभेद्य बना देगा।

करोड़ों की हेरोइन और सैकड़ों ड्रोन्स की बरामदगी ने बढ़ाई थी चिंता

आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए तस्करी का ग्राफ हाल के दिनों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन भारतीय सुरक्षाबलों ने भी हर बार मुंहतोड़ जवाब दिया है। साल 2025 से लेकर 27 जुलाई 2026 के बीच पंजाब बॉर्डर से कुल 474 पाकिस्तानी ड्रोन बरामद किए गए हैं, जबकि 777 किलो से ज्यादा हेरोइन जब्त की गई है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ साल 2026 के शुरुआती सात महीनों में ही 161 ड्रोन और 392 किलो से ज्यादा हेरोइन पकड़ी जा चुकी है। डीजीपी ने बताया कि अब तस्करी केवल जमीनी घुसपैठ तक सीमित नहीं है, बल्कि कूरियर के जरिए कुछ ही घंटों में माल खपाने के लिए ड्रोन्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।

जमीन पर भी पुलिस का कड़ा पहरा, तीसरी आंख से रखी जा रही नजर

आसमान के साथ-साथ जमीन पर भी तस्करों की कमर तोड़ने के लिए पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। सुरक्षा की दूसरी पंक्ति के तहत सात सीमावर्ती जिलों में 64 नाका प्वॉइंट्स की पहचान की गई है, जिनमें से 28 नाके वर्तमान में पूरी तरह से सक्रिय हैं। यहां 317 जवान चौबीसों घंटे मुस्तैद हैं। इसके अलावा बीएसएफ के साथ मिलकर 19 संयुक्त नाके भी चलाए जा रहे हैं। तकनीकी सर्विलांस को मजबूत करने के लिए 49.58 करोड़ रुपये की लागत से बॉर्डर इलाकों में 2,336 सीसीटीवी कैमरों का विशाल नेटवर्क बिछाया गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक यह तकनीक का निरंतर चलने वाला युद्ध है। इसी को देखते हुए साल 2026-27 के लिए यूएवी, बम निरोधक उपकरण और बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदने के लिए लगभग 48 करोड़ रुपये का अलग से बजट भी मंजूर कर लिया गया है ताकि कोई भी कंसाइनमेंट पंजाब के अंदर न आ सके। 

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