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चंडीगढ़ में रेंट एग्रीमेंट का नया कानून, 2 महीने के भीतर ऑनलाइन देनी होगी जानकारी, 60 दिन में खत्म होगा मकान मालिक-किरायेदार का झगड़ा

चंडीगढ़: चंडीगढ़ में मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच लंबे समय से चलने वाले विवादों, अवैध कब्जों और मनमाने किराये पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। चंडीगढ़ प्रशासन के संपदा विभाग ने ‘यूटी चंडीगढ़ टेनेंसी रूल्स, 2026’ को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। 10 सितंबर से पूरे केंद्र शासित प्रदेश में प्रभावी हुए इन नियमों के तहत अब किरायेदारी समझौते से लेकर मकान खाली कराने और सुरक्षा राशि लौटाने तक की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया गया है।

एग्रीमेंट के 2 महीने के भीतर देनी होगी ऑनलाइन जानकारी
नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी मकान या व्यावसायिक संपत्ति को किराये पर देने के बाद मकान मालिक और किरायेदार को आपसी एग्रीमेंट की जानकारी दो महीने के भीतर रेंट अथॉरिटी को ऑनलाइन देनी होगी। यह सूचना दोनों पक्ष संयुक्त रूप से या अलग-अलग दे सकते हैं। ऑनलाइन जानकारी दर्ज होने के सात दिनों के भीतर प्राधिकरण दोनों पक्षों को ई-रसीद के साथ एक विशिष्ट पहचान संख्या (Unique Identification Number) जारी करेगा, जो सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर और ई-मेल पर भेजी जाएगी।

त्रिस्तरीय व्यवस्था से रुकेगी मनमानी, 3 महीने में बनेगा डिजिटल पोर्टल
विवादों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए प्रशासन ने किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण की त्रिस्तरीय मजबूत व्यवस्था तैयार की है। उपायुक्त-सह-संपदा अधिकारी निशांत कुमार यादव (IAS) के अनुसार, प्राधिकरण के गठन के तीन महीने के भीतर एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन अनिवार्य होगा और सभी रिकॉर्ड पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे।

मकान मालिक किराया लेने से मना करे तो प्राधिकरण में जमा कराने की छूट
यदि कोई मकान मालिक जानबूझकर किराया लेने से इनकार करता है या पैसे लेने के बाद रसीद नहीं देता, तो किरायेदार को दो महीने तक आरटीजीएस, एनईएफटी, चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए भुगतान का प्रयास करना होगा। इसके बावजूद यदि मकान मालिक राशि स्वीकार नहीं करता, तो किरायेदार सीधे किराया प्राधिकरण के पास किराया जमा करा सकेगा, जिससे किरायेदार पर डिफाल्टर होने का झूठा आरोप नहीं लगाया जा सकेगा।

अपील पर 60 दिन में फैसला, बार-बार तारीखों का खेल खत्म
किराया, बिजली, पानी, मेंटेनेंस चार्ज और सिक्योरिटी मनी से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए सख्त समय-सीमा तय की गई है। किराया प्राधिकरण में आवेदन दाखिल होने पर दूसरे पक्ष को 15 दिनों के भीतर जवाब देना होगा, जिसे विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं, किराया अधिकरण को नोटिस मिलने के 60 दिनों के भीतर अपील का अंतिम फैसला सुनाना होगा। कोर्ट में बार-बार तारीखें लेने पर रोक लगाने के लिए सामान्यतः केवल एक स्थगन की अनुमति दी जाएगी, जबकि किराया न्यायालय के आदेश का अमल 30 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा।

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