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जालंधर में जोरदार प्रदर्शन, 5-डे वर्किंग पर वादाखिलाफी से भड़के बैंक कर्मी; इस दिन से देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का अल्टीमेटम

जालंधर: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को जालंधर में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का गुस्सा फूट पड़ा। 5-डे वर्किंग वीक लागू करने और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) के निष्पक्ष वितरण की मांग को लेकर बैंक कर्मियों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का सीधा आरोप लगाते हुए दो टूक चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो 26 अक्टूबर से पूरे देश में बैंकिंग व्यवस्था अनिश्चितकाल के लिए ठप कर दी जाएगी।

एसबीआई मुख्य शाखा के बाहर शक्ति प्रदर्शन, गूंजे नारे
शहर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की मुख्य शाखा के बाहर जिलेभर से जुटे सैकड़ों बैंक अधिकारी और कर्मचारी एकत्रित हुए। हाथों में तख्तियां और बैनर थामे प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस रोष प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की भी भारी भागीदारी देखने को मिली, जिन्होंने प्रबंधन की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

5-डे वर्किंग पर समझौता होने के बाद भी पीछे हटी सरकार
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के यूनियन प्रतिनिधि बलजीत सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि जुलाई माह में सरकार और यूनियनों के बीच 5-डे वर्किंग वीक लागू करने पर पूर्ण सहमति बन चुकी थी और इस पर औपचारिक समझौता भी हुआ था। इसके बावजूद सरकार इस फैसले की आधिकारिक अधिसूचना जारी करने से लगातार पीछे भाग रही है। नेताओं ने कहा कि वे सरकार को उसका किया हुआ वादा याद दिलाने के लिए मजबूरन हड़ताल और प्रदर्शन की राह पर निकले हैं।

इंसेंटिव (PLI) वितरण में भारी भेदभाव का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव के वितरण में चल रहे पक्षपात पर कड़ा एतराज जताया। यूनियन का आरोप है कि स्केल-4 और उससे ऊपर के उच्च प्रबंधन स्तर के अधिकारियों को तो मनमाना इंसेंटिव बांट दिया गया, लेकिन ब्रांच स्तर पर दिन-रात काम करने वाले क्लर्क और फ्रंटलाइन स्टाफ को इससे पूरी तरह वंचित रखा गया। यूनियन की मांग है कि बैंक की तरक्की में पसीना बहाने वाले क्लर्क से लेकर शीर्ष अधिकारी तक, सभी कर्मियों को समान और पारदर्शी आधार पर पीएलआई का लाभ मिलना चाहिए।

आगामी हड़ताल की रूपरेखा: 5 दिन ठप रह सकती हैं सेवाएं
यूनियन नेताओं ने साफ किया कि शुक्रवार का प्रदर्शन केवल एक दिन का सांकेतिक विरोध था। यदि सरकार ने वार्ता की मेज पर समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन का दूसरा चरण बेहद कड़ा होगा। आगामी योजना के तहत पहले 3 दिनों की लगातार हड़ताल बुलाई जाएगी, जो शनिवार और रविवार के अवकाश के साथ मिलकर कुल 5 दिनों तक बैंकों के शटर पूरी तरह गिरा देगी। यदि इसके बाद भी गतिरोध बना रहा, तो 26 अक्टूबर से सभी सरकारी व निजी बैंक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

‘नो वर्क, नो पे’ के बावजूद अधिकारों के लिए वेतन कटाने को तैयार
कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में ‘नो वर्क, नो पे’ का नियम लागू होता है, जिसका मतलब है कि हड़ताल के दिनों का उनका वेतन कटेगा। इसके बावजूद अपनी मेहनत की कमाई कटवाकर वे आत्मसम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए मैदान में उतरे हैं। कर्मचारी नेताओं ने ऐलान किया कि जब तक 5-डे वर्किंग और सम्मानजनक इंसेंटिव लागू नहीं होता, उनका लोकतांत्रिक संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

Massive protest in Jalandhar; bank employees outraged over the reneging on the 5-day work week promise