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जालंधर के स्वर्णजीत सिंह ने अमेरिका में रचा इतिहास, कनेक्टिकट के पहले सिख मेयर बने; पत्नी और बच्चों की मौजूदगी में ली शपथ

जालंधर/नॉर्विच: जालंधर से ताल्लुक रखने वाले स्वर्णजीत सिंह खालसा ने सात समंदर पार अमेरिका में एक नया इतिहास रच दिया है। स्वर्णजीत सिंह नॉर्विच शहर के मेयर बन गए हैं और उन्होंने कनेक्टिकट राज्य के पहले सिख मेयर के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। भारतीय समयानुसार मंगलवार रात करीब 12 बजे नॉर्विच सिटी हॉल में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। इस ऐतिहासिक पल के गवाह उनकी पत्नी गुंटास कौर, बेटी सूही कौर और बेटा अमन कौर बने, जो मंच पर उनके साथ मौजूद थे।

शपथ ग्रहण समारोह बेहद खास रहा, जहां कनेक्टिकट की लेफ्टिनेंट गवर्नर सुजैन बायसिविक्ज ने स्वर्णजीत सिंह को शपथ दिलाई। इस मौके पर राज्य के गवर्नर नेड लेमोंट और नॉर्विच के पूर्व मेयर बेन लैथ्रोप भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। स्वर्णजीत ने इस समारोह के लिए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए एक ओपन इनविटेशन दिया था, जिसके चलते स्थानीय नागरिकों के अलावा सिख समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में सिटी हॉल पहुंचे। वहां मौजूद भीड़ ने जयकारों के साथ उनका स्वागत किया और नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। उनके साथ ही इस कार्यक्रम में 6 काउंसलर्स और शिक्षा बोर्ड के 9 सदस्यों ने भी शपथ ग्रहण की।

मेयर का पद संभालने के तुरंत बाद स्वर्णजीत सिंह खालसा ने शहर के विकास का रोडमैप साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नॉर्विच का विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने वादा किया कि वे शहर के एजुकेशन सिस्टम को इतना बेहतर बनाएंगे कि हर बच्चे को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके। इसके अलावा, टैक्स कम करना, शहर को आर्थिक रूप से दोबारा मजबूत बनाना और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को वापस लाना उनके प्रमुख एजेंडे में शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि शहर के विकास के लिए खालसा ने पंजाबियों को भी नॉर्विच आने का खुला निमंत्रण दिया है।

गौरतलब है कि 5 नवंबर को हुए चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार स्वर्णजीत सिंह ने अपनी प्रतिद्वंद्वी ट्रेसी गोल्ड को हराकर यह जीत हासिल की थी। स्वर्णजीत को 2458 वोट मिले, जबकि गोल्ड को 2250 वोटों पर संतोष करना पड़ा। खास बात यह है कि जिस क्षेत्र से वे जीते हैं, वहां महज 10 सिख परिवार रहते हैं। इसके बावजूद स्थानीय अमेरिकियों के भारी समर्थन और जनहित के मुद्दों को उठाने की वजह से वे यह मुकाम हासिल कर पाए। वे इससे पहले दो बार यहां काउंसलर भी रह चुके हैं।

पेशे से इंजीनियर स्वर्णजीत सिंह का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है। करीब 18 साल पहले वे जालंधर के गुरु तेग बहादुर नगर से अमेरिका गए थे। उन्होंने जालंधर के डीएवी कॉलेज से पढ़ाई की है। राजनीति उन्हें विरासत में मिली है, उनके दादा इंदरपाल सिंह खालसा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी और शिरोमणि अकाली दल के सदस्य रहे थे। अमेरिका जाने के बाद 9/11 हमले के बाद सिखों के प्रति बदली धारणा को सुधारने और उनके मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के कारण स्वर्णजीत लाइमलाइट में आए थे और धीरे-धीरे वहां की राजनीति में अपनी मजबूत जगह बना ली।

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