जालंधर: जालंधर के वार्ड नंबर-1 में विकास कार्यों को लेकर वीरवार देर रात आम आदमी पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुए जबरदस्त टकराव में पुलिस की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। मौके के हालात और चश्मदीदों के मुताबिक उस रात दोनों पक्षों के बीच बराबर की लड़ाई हुई थी, लेकिन पुलिस ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए केवल एक पक्ष यानी कांग्रेस नेताओं पर ही शिकंजा कसा है। थाना-1 की पुलिस ने आप नेता सिमरनजीत सिंह की शिकायत पर महिला कांग्रेसी पार्षद आशु शर्मा, उनके पति गौरव शर्मा और करीब दर्जन भर समर्थकों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है, जबकि दूसरे पक्ष पर कोई आंच नहीं आई है।
इस मामले में पुलिस ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए पार्षद आशु शर्मा, उनके पति गौरव शर्मा (नोनी शर्मा), बंटी अरोड़ा, अनमोल कालिया और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 115(2), 304, 351(3), 190, 191 के अलावा आर्म्स एक्ट 25 (1-B) (a) और एससी-एसटी एक्ट 1989 की धारा 3(1) के तहत एफआईआर दर्ज की है। यह पूरा विवाद इलाके में विकास कार्यों का श्रेय लेने और वर्चस्व को लेकर शुरू हुआ था, जिसमें आप की चुनाव लड़ चुकी नेत्री के बेटे और वार्ड इंचार्ज का कांग्रेसी पार्षद गुट से आमना-सामना हुआ था। देखते ही देखते बहसबाजी हिंसक झड़प में बदल गई थी, जिसमें दोनों तरफ से जमकर जोर-आजमाइश हुई थी।
पुलिस की इस एकतरफा कार्रवाई पर महिला पार्षद आशु शर्मा और उनके पति गौरव शर्मा ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मान सरकार उनके साथ सरासर धक्का कर रही है। आशु शर्मा का कहना है कि झड़प में उनका पक्ष भी पीड़ित था, लेकिन पुलिस ने उनका बयान तक दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि लड़ाई दोनों तरफ से हुई थी, लेकिन पुलिस ने सत्ता के दबाव में आकर सिर्फ उन पर और उनके परिवार पर झूठा पर्चा दर्ज किया है। उन्होंने विशेष रूप से एससी एक्ट की धारा को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए इसे राजनीतिक रंजिश करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच करने के बजाय सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है।

In Jalandhar, police take one-sided action, filing a case against a female councilor and her husband under the SC/ST Act




