जालंधर: जालंधर देहात पुलिस ने नकोदर में नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में एक आशा वर्कर और कोर्ट कर्मचारी समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में एक दिल दहला देने वाला सच सामने आया है कि बच्चे का अपना पिता ही इस सौदे का मुख्य आरोपी निकला। उसने चार लाख रुपये के लालच में न सिर्फ अपना बच्चा बेच दिया, बल्कि अपनी पत्नी को यह झूठी कहानी सुना दी कि उनका बच्चा पैदा होते ही मर गया है।
पुलिस की यह कार्रवाई तब हुई जब नकोदर के उगी चौकी इंचार्ज अंग्रेज सिंह नाकाबंदी कर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान मोगा की तरफ से आ रही एक इनोवा गाड़ी को रोका गया, जिसमें कुछ लोग एक नवजात बच्चे के साथ बैठे थे। पुलिस की पूछताछ में जब वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए तो सख्ती बरतने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। पता चला कि आरोपी इस बच्चे को मोगा से खरीदकर लाए थे और इसे काला संघिया की तरफ किसी निसंतान दंपति को बेचने जा रहे थे। इस बच्चे का सौदा चार लाख रुपये में तय हुआ था।
इस गिरोह का नेटवर्क काफी फैला हुआ है जिसमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे के पिता बलजीत सिंह ने पैसों के लिए अपने ही खून का सौदा कर लिया था। इसमें एक आशा वर्कर रजनी और मोगा कोर्ट का एक दर्जा-चार कर्मचारी गगनदीप भी शामिल थे, जिन्होंने बच्चे को आगे बेचने में मदद की। इसके अलावा कुलविंदर कौर नाम की महिला ने बिचौलिए की भूमिका निभाई, जबकि एक आईवीएफ सेंटर में काम करने वाली रीना नाम की महिला उन निसंतान दंपतियों की जानकारी जुटाती थी जिन्हें बच्चा चाहिए होता था।
पुलिस ने बताया कि लुधियाना की रहने वाली रणजीत कौर इस पूरे गिरोह की मुख्य सरगना के तौर पर सामने आई है। पूछताछ में यह भी पता चला है कि इन लोगों ने करीब डेढ़ महीने पहले भी एक बच्चा इसी तरह बेचा था। पुलिस ने सभी आठ आरोपियों को अदालत में पेश कर तीन दिन का रिमांड हासिल किया है ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों और अब तक बेचे गए बच्चों की जानकारी मिल सके। फिलहाल पुलिस मनप्रीत और शमशेर नाम के दो फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

Child trafficking gang busted in Jalandhar, including an ASHA worker arrested




