चंडीगढ़: देश भर के प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर साल की जाने वाली मनमानी फीस बढ़ोतरी से परेशान लाखों अभिभावकों के लिए केंद्र सरकार ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। अक्सर माता-पिता यह सोचकर असमंजस में रहते हैं कि सीबीएसई (CBSE) से मान्यता प्राप्त स्कूलों पर केवल केंद्रीय बोर्ड का ही नियंत्रण होता है, लेकिन लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन स्कूलों पर लगाम लगाने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का असली पावर राज्य सरकारों के हाथों में ही है। इसी बीच, पंजाब सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगाए गए 5 प्रतिशत के कैप को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में आज एक बेहद अहम सुनवाई हुई, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई थीं।
आप सांसद के सवाल पर केंद्र का दो टूक जवाब, राज्य ही हैं सर्वोपरि
लोकसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राजकुमार चब्बेवाल द्वारा प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को लेकर पूछे गए एक महत्वपूर्ण सवाल के लिखित जवाब में केंद्र सरकार ने यह तस्वीर साफ की है। केंद्र ने दो टूक कहा है कि प्राइवेट स्कूल चाहे सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध ही क्यों न हों, उन पर फीस को रेगुलेट करने, अनाप-शनाप बढ़ोतरी को रोकने और नियम तोड़ने वाले प्रबंधनों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने का मुख्य और कानूनी अधिकार संबंधित राज्य सरकारों के पास ही होता है। राज्य सरकारें अपनी स्थानीय शिक्षा नीतियों और फीस रेगुलेटरी कानूनों के तहत इन स्कूलों पर पूरी तरह से नकेल कस सकती हैं।
अभिभावकों को कहां करनी चाहिए शिकायत? जानिए सही रास्ता
कई बार सही जानकारी के अभाव में माता-पिता स्कूलों की मनमानी और अवैध वसूली के खिलाफ सही जगह अपनी आवाज नहीं पहुंचा पाते हैं। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि यदि किसी भी अभिभावक को प्राइवेट स्कूल की फीस से जुड़ी या कोई अन्य शिकायत दर्ज करानी है, तो वे सीधे अपने जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) या राज्य सरकार द्वारा गठित ‘स्टेट फीस रेगुलेटरी कमेटी’ के समक्ष अपनी शिकायत रख सकते हैं। इसके अलावा, अगर स्कूल सीबीएसई से जुड़ा है, तो अभिभावक सीबीएसई के आधिकारिक ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसके आधार पर प्रशासन द्वारा उचित कदम उठाए जाते हैं।
पंजाब में 5% फीस कैप का मामला गरमाया, हाईकोर्ट ने दी 4 अगस्त की तारीख
फीस बढ़ोतरी के मुद्दे पर पंजाब सरकार ने हाल ही में अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए एक सख्त नियम लागू किया है, जिसके तहत राज्य का कोई भी प्राइवेट स्कूल एक साल में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता। हालांकि, सरकार के इस कड़े आदेश के खिलाफ कई प्राइवेट स्कूल प्रबंधनों ने लामबंद होकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। लाखों अभिभावकों की जेब और बच्चों के भविष्य से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में आज (28 जुलाई) हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस केस की अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तारीख मुकर्रर कर दी है, जिस पर अब सभी पैरेंट्स की निगाहें टिकी हुई हैं।


Centre clarifies stance on arbitrary fees charged by private schools; High Court update on Punjab’s 5% cap.








