
चंडीगढ़: पंजाब के करीब 50 किसान संगठनों ने फतेहगढ़ साहिब से दिल्ली के लिए कूच कर दिया है। सोमवार रात को 5 घंटे लंबी चली बातचीत के बाद भी सरकार से कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अब किसान दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। किसान फिलहाल 500 ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ दिल्ली के निकले हैं।
किसान अपने लिए राशन समेत अन्य जरूरी सामान भी ट्रालियों में रखे हुए हैं। किसानों की मंशा है कि दिल्ली में पहुंचकर आंदोलन को लंबा चलाया जाए, ताकि पिछली बार की तरह ही पूरे देश में किसानों के समर्थन में माहौल बन सके।
उनके साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग भी हैं। ऐसे में पुलिस के लिए इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर पाना भी आसान नहीं होगा। किसानों और पुलिस प्रशासन के बीच पहला मोर्चा अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पर दिखेगा। यह हरियाणा एवं पंजाब के बीच सबसे प्रमुख बॉर्डर है।
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि सरकार तो हमारे साथ दुश्मन जैसा बर्ताव कर रही है। आंदोलन करना हमारा लोकतांत्रिक हक है, लेकिन हमें रोका जा रहा है। हमारे सोशल मीडिया अकाउंट्स बैन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब के बीच ऐसी किलेबंदी है कि लगता है ये दोनों भारत के राज्य नहीं हैं बल्कि अलग-अलग देश हैं।

किसान संगठनों का कहना है कि वे शंभू ब़ॉर्डर और खनौरी सीमा से दिल्ली की ओर बढ़ेंगे। यदि उन्हें रोका जाता है तो फिर तुरंत ही फैसला लिया जाएगा कि आगे क्या एक्शन होगा।
दिल्ली कूच करने से पहले किसान संगठनों के नेता सरवन सिंह पंढेर समेत कई लोगों ने मीडिया से बात भी की। इन लोगों ने कहा कि सरकार ने एमएसपी कानून पर कोई ठोस वादा नहीं किया है। अब तक कमेटी गठित करने की ही बात हो रही है। यही बात तो दो साल पहले भी कही गई थी।

उन्होंने कहा कि हम अब एक्शन चाहते हैं और सरकार को तुरंत नोटिफिकेशन जारी कर देना चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि एमएसपी लागू हुई तो उससे महंगाई में इजाफा होगा और देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
किसानों की ये हैं मांगें
मोगा, बठिंडा और जालंधर जिलों के कई किसान भी मार्च में शामिल होने के लिए अपने गांवों से निकल पड़े हैं। एसकेएम (गैर-राजनीतिक) नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि ट्रैक्टर-ट्रॉली सोमवार शाम को फतेहगढ़ साहिब जिले और संगरूर के मेहलन चौक पर इकट्ठा होंगी।

राष्ट्रीय राजधानी में 13 फरवरी को किसानों के प्रस्तावित ‘दिल्ली चलो’ मार्च के मद्देनजर सिंघू, गाजीपुर और टिकरी सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है तथा यातायात पाबंदियां लागू की गयी हैं। किसान नेताओं और तीन केंद्रीय मंत्रियों की पहली बैठक आठ फरवरी को हुई थी।
किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी के अलावा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, पुलिस मामलों को वापस लेने और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘‘न्याय’’ की भी मांग कर रहे हैं।



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Farmers set out towards Delhi in tractors, the first front will be at Shambhu border; Preparing to fight a long battle this time too





