चंडीगढ़: करीब 657 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ा दावा किया है। हरियाणा की सीबीआई विशेष अदालत में जांच एजेंसी ने बताया कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड रिभव ऋषि के बेहद करीबी सहयोगी के रूप में काम कर रहे थे। सीबीआई का स्पष्ट आरोप है कि अग्रवाल ने रिभव ऋषि से न केवल आर्थिक बल्कि अन्य ‘अनैतिक’ लाभ भी प्राप्त किए हैं। अदालत में अग्रवाल की जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए सीबीआई ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिसमें बताया गया है कि अग्रवाल ने अपने प्रभार वाले दो अलग-अलग विभागों में राज्य वित्त विभाग के सख्त दिशानिर्देशों को ताक पर रखकर गैरकानूनी तरीके से बैंक खाते खुलवाए, जिससे करोड़ों रुपये के सरकारी फंड की हेराफेरी का रास्ता साफ हुआ।
स्कूल शिक्षा विभाग: नियमों को ताक पर रखकर बिना टेंडर खोले गए खाते
सीबीआई ने अदालत को जानकारी दी कि पंकज अग्रवाल ने 10 दिसंबर 2024 से 16 जून 2025 तक स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव का पदभार संभाला था। हैरान करने वाली बात यह है कि चार्ज संभालने के महज सात दिन के भीतर ही उनके पास 17 दिसंबर 2024 को आईडीएफसी (IDFC) फर्स्ट बैंक, सेक्टर 32, चंडीगढ़ की ओर से ‘हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद’ (HSSPP) का खाता खोलने का एक प्रस्ताव पहुंच गया। यह प्रस्ताव सीधे उन्हें संबोधित था। नियमों को दरकिनार करते हुए, बिना किसी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया या टेंडर निकाले, अग्रवाल ने 31 दिसंबर 2024 को इस खाते को खोलने की मंजूरी दे दी। साथ ही, कोटक महिंद्रा बैंक के खाते से 100 करोड़ रुपये आईडीएफसी बैंक में ट्रांसफर करने को भी हरी झंडी दे दी। सीबीआई के मुताबिक, आईडीएफसी बैंक के लिए निवेश की सीमा केवल 50 करोड़ रुपये थी, लेकिन अग्रवाल ने इसे भी नजरअंदाज कर दिया। इसी खाते में 101 फर्जी डेबिट और 33 क्रेडिट ट्रांजैक्शन हुए, जिससे करीब 50.54 करोड़ रुपये का सीधा गबन हुआ।
चार्ज संभालते ही पुरानी फाइलों को फिर किया जिंदा
सीबीआई की जांच में अग्रवाल की भूमिका केवल एक विभाग तक सीमित नहीं मिली। 20 जून 2025 को जब उन्होंने कृषि और किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव का पदभार ग्रहण किया, तो वहां भी इसी तरह का खेल खेला गया। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) का खाता खोलने का जो प्रस्ताव 21 मई 2025 को अटका पड़ा था, अग्रवाल के आते ही वह अचानक फिर से सक्रिय हो गया। उनके सीधा हस्तक्षेप से उसी दिन प्रस्ताव को मंजूरी मिली और ‘हरियाणा मार्केटिंग डेवलपमेंट फंड’ के नाम से नया खाता खोल दिया गया। इसी खाते से 14 जनवरी 2026 को एक रद्द चेक का इस्तेमाल करके 10 करोड़ रुपये की बड़ी रकम मेसर्स एसआरआर प्लानिंग गुरुज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स मन्नत कॉन्ट्रैक्टर्स के नाम पर फर्जी तरीके से निकाल ली गई।
मास्टरमाइंड से नियमित संपर्क में थे अग्रवाल, दबाव डालकर बदलवाईं फाइलें
गिरफ्तारी के बाद से आईएएस पंकज अग्रवाल लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने कभी कोई रिश्वत नहीं मांगी या ली, और उनका काम सिर्फ अधीनस्थ अधिकारियों से मिले प्रस्तावों को प्रशासनिक मंजूरी देना था। लेकिन सीबीआई ने अदालत में इन दावों की धज्जियां उड़ा दीं। एजेंसी ने बताया कि अग्रवाल ने अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव डालकर फाइलें और नोटशीट बदलवाईं। सीबीआई ने अदालत में यह भी बताया कि अग्रवाल को भली-भांति पता था कि घोटाले का मास्टरमाइंड रिभव ऋषि आईडीएफसी बैंक से निकाला जा चुका है, इसके बावजूद वह लगातार उसके संपर्क में थे। जांच एजेंसी का दावा है कि अग्रवाल को इस पूरे फर्जीवाड़े की भली-भांति जानकारी थी और वह सरकारी पैसे की हेराफेरी में मदद करने के एवज में लगातार आर्थिक और अन्य लाभ ले रहे थे।


Major claim by CBI in the ₹657 crore IDFC Bank scam: IAS officer Pankaj Agrawal is a close associate of the mastermind








