You are currently viewing कनाडा में 9500 पंजाबियों पर मंडराया डिपोर्टेशन का खतरा, 21 दिन की मोहलत, सरकार के 2 फैसलों ने उड़ाई नींद

कनाडा में 9500 पंजाबियों पर मंडराया डिपोर्टेशन का खतरा, 21 दिन की मोहलत, सरकार के 2 फैसलों ने उड़ाई नींद

ओटावा: बेहतर जिंदगी और सुनहरे करियर का सपना लेकर कनाडा पहुंचे हजारों पंजाबी युवाओं पर इन दिनों एक बड़ा संकट टूट पड़ा है। ‘मिनी पंजाब’ कहे जाने वाले इस देश में अचानक परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। ट्रूडो सरकार के दो अलग-अलग सख्त फैसलों ने वहां रह रहे प्रवासी भारतीयों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों को उस मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से उन्हें कभी भी भारत वापस भेजा जा सकता है। हालात इतने गंभीर हैं कि 9,500 से अधिक पंजाबियों पर निर्वासनका सीधा खतरा मंडरा रहा है, जिससे कनाडा में बसे पूरे भारतीय समुदाय में दहशत का माहौल पैदा हो गया है।

कैलगरी में वर्क परमिट रिजेक्शन, 500 से ज्यादा छात्रों का भविष्य दांव पर

डिपोर्टेशन के इस बड़े संकट के बीच पढ़ाई पूरी कर चुके छात्रों पर भी एक भारी आफत टूट पड़ी है। जुलाई 2026 की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अल्बर्टा प्रांत के कैलगरी शहर में 500 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर पंजाब से ही ताल्लुक रखते हैं। कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (IRCC) ने पोटाज कॉलेज (Portage College) से पढ़ाई करने वाले इन छात्रों के पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) आवेदनों को सामूहिक रूप से खारिज कर दिया है। विभाग ने चौंकाने वाला तर्क देते हुए इनके कोर्स को ‘नॉन-क्रेडिटेबल’ करार दिया है, जिसके चलते इन छात्रों की सारी मेहनत और पैसा बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया है।

नए इमिग्रेशन कानून ‘बिल सी-12’ से मचा हड़कंप

इस बड़े संकट की दूसरी सबसे अहम वजह इस साल अप्रैल 2026 में कनाडा सरकार द्वारा पास किया गया सख्त इमिग्रेशन कानून (बिल सी-12) है। इस नए कानून के जरिए सरकार ने शरणार्थियों (असाइलम सीकर्स) से जुड़े नियमों में बड़ा और कड़ा बदलाव कर दिया है। इस सख्ती की जद में सबसे ज्यादा वे पूर्व अंतर्राष्ट्रीय छात्र आ रहे हैं, जो अपना वर्क परमिट खत्म होने के बाद कानूनी तौर पर कनाडा में रुकने के लिए शरण मांगने का रास्ता अपना चुके थे। इमिग्रेशन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसे कुल 30,000 लोगों को ‘प्रसीजरल फेयरनेस नोटिस’ (चेतावनी पत्र) थमा दिए हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन 30 हजार लोगों में से लगभग 9,000 लोग केवल पंजाब मूल के हैं। सरकार ने इन्हें अपना पक्ष रखने के लिए महज 21 दिनों की मोहलत दी है, ऐसा न कर पाने की स्थिति में सीधे डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

Deportation threat looms over 9,500 Punjabis in Canada; 21-day reprieve granted