You are currently viewing ‘एक ही गांव में लव मैरिज की तो खैर नहीं…’, पंजाब की इस पंचायत ने सुनाया तुगलकी फरमान, सीधे गांव से निकालने की चेतावनी

‘एक ही गांव में लव मैरिज की तो खैर नहीं…’, पंजाब की इस पंचायत ने सुनाया तुगलकी फरमान, सीधे गांव से निकालने की चेतावनी

रूपनगर: पंजाब के रूपनगर (रोपड़) जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां उइंद गांव की पंचायत ने एक ही गांव में प्रेम विवाह (लव मैरिज) करने वाले युवक-युवतियों के खिलाफ बेहद सख्त और विवादित फैसला सुनाया है। पंचायत ने खुला फरमान जारी किया है कि यदि गांव का कोई भी लड़का या लड़की आपस में लव मैरिज करता है, तो उनका पूर्ण रूप से सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा और उन्हें गांव से बेदखल कर दिया जाएगा। इस फैसले के बाद से पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

पांच-छह मामलों के बाद पंचायत ने उठाया सख्त कदम

उइंद गांव के सरपंच और पंचायत सदस्यों ने मिलकर इस कड़े प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। गांव के सरपंच के मुताबिक, पिछले कुछ समय में उनके ही गांव के भीतर युवक-युवतियों के बीच प्रेम विवाह के करीब पांच से छह मामले सामने आ चुके हैं। इसी बढ़ते चलन को रोकने और गांव की सामाजिक मर्यादा का हवाला देते हुए पंचायत ने यह कदम उठाया है। पंचायत ने सख्त हिदायत दी है कि भविष्य में जो भी ऐसा करेगा, उसे गांव में रहने का कोई अधिकार नहीं होगा और पूरे गांव का कोई भी व्यक्ति उनसे किसी तरह का वास्ता नहीं रखेगा।

पंजाब में पहले भी आ चुके हैं ऐसे कई विवादित फरमान

प्रेम विवाह के खिलाफ पंचायत का यह फरमान पंजाब में कोई नया या इकलौता मामला नहीं है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से अक्सर ऐसी पंचायतें सामने आती रही हैं जो अपने कानून खुद तय करती हैं। जानकारी के अनुसार, साल 2025 से लेकर अब तक पूरे प्रदेश में लगभग 9 गांवों की पंचायतें इसी तरह के विवादित प्रस्ताव पास कर चुकी हैं। इन सभी प्रस्तावों में प्रेमी जोड़ों का बहिष्कार करने, उन्हें गांव से बाहर निकालने और यहां तक कि उनका समर्थन करने वाले परिवारों का भी ‘सोशल बायकॉट’ करने जैसे कड़े फरमान शामिल रहे हैं।

कानून के जानकारों ने बताया पूरी तरह असंवैधानिक

पंचायत के इस तानाशाही भरे फैसले पर अब कानूनी सवाल भी खड़े होने लगे हैं। कानून के जानकारों और विशेषज्ञों ने पंचायतों के इस तरह के फरमानों को पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक करार दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि भारत का संविधान हर बालिग नागरिक को अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार देता है। किसी भी पंचायत या संस्था के पास यह कानूनी अधिकार नहीं है कि वह किसी नागरिक को उसकी पसंद से शादी करने से रोके या अपने स्तर पर उनका सामाजिक बहिष्कार कर उन्हें सजा सुनाए। 

This Punjab Panchayat Issues an Absurd Decree, Warning of Immediate Expulsion from the Village