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1950 में पंजाब के बटाला शहर में स्वामी लीलाशाह बापू ने किया था जो संकल्प वो सत्य साबित हुआ, संत श्री आसाराम जी बापू के करकमलों द्वारा प्रज्ज्वलित ज्योत का बटाला आगमन पर हुआ भव्य स्वागत, सैंकड़ो भक्तजन हुए नतमस्तक,

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1950 में पंजाब के बटाला शहर में स्वामी लीलाशाह बापू ने किया था जो संकल्प वो सत्य हुआ

संत श्री आसाराम जी बापू के करकमलों द्वारा प्रज्ज्वलित ज्योत का बटाला आगमन पर हुआ भव्य स्वागत, सैंकड़ो भक्तजन हुए नतमस्तक,1950 में स्वामी लीलाशाह महाराज आये थे बटाला

बटाला ( नरेश कुमार) श्री योग वेदांत सेवा समिति बटाला के प्रधान श्री अशोक अग्रवाल की अध्यक्षता में समिति द्वारा दैनिक प्रार्थना सभा किला मंडी बटाला में सन्त श्री आशाराम बापूजी महाराज द्वारा प्रज्वलित अखण्ड श्री ज्योत का भव्य स्वागत और शरद पूनम के निमित भव्य सत्संग का आयोजन किया गया।

जिसमें साध्वी ज्ञप्ति बहन ने श्री ज्योत की महिमा बताई और साथ ही साथ बताया कि ये ज्योत पूज्य बापूजी ने आज से लगभग 10 साल पहले औरंगाबाद( महाराष्ट्र) में अपने कर कमलों द्वारा प्रज्वलित की थी।
आज बापूजी की आज्ञा से पुरे भारत भर में घर घर ज्योत के अभियान के तहत ये श्री ज्योत बटाला में आई है।और साधको की खुशी का ठिकाना नही है।
इस सत्संग से पहले श्री ज्योत पूजन यात्रा सुंदर नगर से शुरू होकर के मान नगर,न्यू हरनाम नगर बख्खेवाल ,डेरा रोड, गान्धी चोंक , समाध रोड ,खजुरी गेट से होते हुए किला मंडी पहुंची ।

यहाँ साध्वी जी ने बताया कि 1950 में हमारे गुरुदेव के गुरुदेव साई लीलाशाह जी भी किला मंडी बटाला में 7 दिन ठहरे थे।ओर उनके श्री मुख से निकला था कि इस जगह पर मेरे चेले के चेले(शिष्य के शिष्य) सत्संग करेगें।

स्वामी लीला शाह जी के श्री मुख से निकले हुए येवचन सत्य साबित होते हुए साधकों ने प्रत्यक्ष देखा गया। क्यों कि स्वामी लीलाशाह जी के सतशिष्य पूज्य बापू जी और उन की शिष्या ज्ञप्ति बहन द्वारा सत्संग किया गया।

यही वो पावन स्थान है यहां पर बैठ कर के साधकों ने सत्संग श्रवण किया ।

इस मौके इस सत्संग में बहुत सी समाज सेवी संस्थाएँ ओर बहुत सारे समाज सेवक शामिल हुए।

यहाँ से श्री ज्योत पूजन यात्रा आगे बढ़ती हुई गुरुद्वारा कंध साहिब ,ओहरी चोंक,बैंक कॉलोनी से होते हुए ग़ांधी चोंक से कादियां की तरफ रवाना हो गई।
इस मौके मंगा,नरेश हर्ष मोनिका समेत कई साधकगण उपस्थित हुए।

आप को बता दें कि श्री गुरुनानक देव जी की शादी भी इसी शहर में हुई थी जिस दीवार (कंद)पर श्री गुरु नानक देव जी बैठे थे वो आज भी मौजूद है। जहा पर गुरुद्वारा कंद साहिब बना हुआ है।