चंडीगढ़: उत्तर-पश्चिम भारत में धमाकेदार एंट्री करने के महज दो हफ्ते बाद ही पंजाब में मानसून की रफ्तार अचानक थम गई है। मौसम प्रणालियों में आए बड़े बदलावों के कारण राज्य में बादलों ने बेरुखी अख्तियार कर ली है, जिससे किसानों और आम जनता की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई महीने में 16 तारीख तक पंजाब में सामान्य से 24 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, मौसम विभाग ने राहत की खबर देते हुए आने वाले दिनों में भारी बारिश का येलो अलर्ट भी जारी किया है।
मौसम विभाग के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
जुलाई की शुरुआत में पंजाब में मानसून का प्रदर्शन बेहद शानदार था और 3 जुलाई तक पूरे राज्य में सामान्य से 89 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी थी। लेकिन इसके बाद मानसून की गतिविधियां लगातार कमजोर पड़ती चली गईं। आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई से 16 जुलाई की सुबह तक पंजाब में सामान्य तौर पर होने वाली 79.4 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले केवल 60.1 मिलीमीटर पानी ही बरसा है। राज्य के 23 में से 17 जिलों में स्थिति खराब है और वहां सामान्य से बेहद कम वर्षा हुई है। पूरे सूबे में सिर्फ पांच जिले— फरीदकोट, फिरोजपुर, गुरदासपुर, लुधियाना और मोगा ही ऐसे हैं, जहां बारिश का आंकड़ा संतोषजनक रहा है। इस दौरान पठानकोट में सबसे ज्यादा 144.3 मिलीमीटर जबकि श्री मुक्तसर साहिब में सबसे कम महज 9.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है।
आखिर क्यों गायब हो गए पंजाब से बादल?
मौसम वैज्ञानिकों ने पंजाब में कम बारिश होने के पीछे कई बड़े वैश्विक और स्थानीय मौसमी कारणों का हवाला दिया है। आईएमडी के बुलेटिन के अनुसार, इस समय प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ (El Niño) की स्थिति बनी हुई है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देती है। इसके साथ ही, भूमध्य रेखा के आसपास चक्कर लगाने वाला वायुमंडलीय विक्षोभ यानी ‘मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन’ (MJO) भी इस समय काफी कमजोर पड़ गया है। अल नीनो का मजबूत होना और एमजेओ का कमजोर होना, दोनों मिलकर मानसून के लिए एक घातक स्थिति पैदा करते हैं। इसके अलावा, बारिश कराने वाली मुख्य प्रणाली ‘मानसून ट्रफ’ भी अपनी सामान्य स्थिति से खिसककर उत्तर में हिमालय की तलहटी की ओर चली गई है, जिससे पंजाब के मैदानी इलाकों में सूखा छा गया है।
20 जुलाई से बदलेगा मौसम, जारी हुआ अलर्ट
मौसम के इस सूखे स्पेल के बीच राहत की बड़ी उम्मीद जग रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 19 जुलाई को एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) इस क्षेत्र में दस्तक देने वाला है। इसके प्रभाव से मानसून एक बार फिर सक्रिय होगा और 20 से 22 जुलाई के बीच पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ व्यापक बारिश देखने को मिल सकती है। कुछ इलाकों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने तीन दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि, विभाग ने यह भी साफ किया है कि अगले दो हफ्तों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है और उमस भरी गर्मी परेशान करेगी, लेकिन हीटवेव (लू) चलने की कोई संभावना नहीं है।


Why did the monsoon suddenly stall in Punjab? Amidst drought-like conditions in 17 districts




