
नई दिल्ली: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन, मिनरल्स समेत कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। विटामिन ई और बी12 की तरह ही विटामिन डी भी शरीर के लिए बेहद आवश्यक है. यह हमारी हड्डियों, दांतों और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में बड़ा रोल निभाता है। लेकिन सेहतमंद रहने की चाह में क्या आप भी विटामिन डी की गोलियां ले रहे हैं?
अगर आप भी बिना सोचे-समझे विटामिन डी की गोलियां खा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि विटामिन डी का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल फायदे की जगह आपकी किडनी तक को फेल कर सकता है।
एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी के सलाहकार नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी स्पेशलिस्ट) डॉ. नवीनथ एम चेन्नई ने विटामिन डी के ओवरडोज से होने वाले गंभीर नुकसानों के बारे में बताया है। डॉ. नवीनाथ के अनुसार, ज्यादातर लोगों को रोजाना केवल 400 से 1,000 IU (इंटरनेशनल यूनिट) विटामिन डी की आवश्यकता होती है, लेकिन अगर कोई रोज 4,000 IU से ज्यादा या कई महीनों तक 8,000–12,000 IU लेता है, तो यह सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने बताया कि कुछ लोग अनजाने में 60,000 IU जैसी बहुत अधिक मात्रा ले लेते हैं, जिससे खून में कैल्शियम का स्तर (हाइपरकैल्सीमिया) बढ़ जाता है और किडनी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। शरीर में विटामिन डी की यह अधिकता किडनी के लिए बहुत नुकसानदायक है, क्योंकि जब किडनी को खून से अतिरिक्त कैल्शियम फिल्टर करना पड़ता है, तो यह कैल्शियम जमा होकर ‘किडनी की पथरी’ बना सकता है, किडनी के फिल्टरों को डैमेज कर सकता है और गंभीर मामलों में ‘किडनी फेलियर’ का कारण भी बन सकता है।
डॉ. नवीनाथ की मानें तो विटामिन डी के ओवरडोज के लक्षण हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देते हैं, इसलिए इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, अगर आपको लक्षण महसूस हों, तो तुरंत सतर्क हो जाने की जरूरत है। इन लक्षणों में मतली और उल्टी होना, बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना शामिल है। इसके अलावा, भ्रम की स्थिति, हद से ज्यादा थकान, या पीठ के निचले हिस्से या बगल में दर्द होना (जो किडनी का दर्द हो सकता है) भी शरीर में विटामिन डी की अधिकता का संकेत हो सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किडनी बुरी तरह डैमेज होने लगे, तो पैरों में सूजन, थकान और सांस लेने में तकलीफ जैसे किडनी फेलियर के लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
कैसे करें बचाव? एक्सपर्ट्स के अनुसार, विटामिन डी का ओवरडोज आमतौर पर तब होता है जब लोग बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेने लगते हैं. इससे बचने के लिए, विटामिन डी हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लें और उनकी बताई हुई खुराक से ज्यादा कभी न लें। अगर आपको लंबे समय तक सप्लीमेंट लेना है, तो समय-समय पर खून की जांच करवाते रहें ताकि विटामिन डी और कैल्शियम का लेवल ठीक बना रहे।
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Vitamin D overdose can cause kidney damage




