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VIDEO: लिव-इन पार्टनर की हत्या के आरोपी को पुलिस ने सरेआम रस्सी से बांधकर पीटा, सड़क पर घसीटा और जमकर बरसाई लाठियां; इंस्पेक्टर बोले- छवि बचाने के लिए जरूरी था

भावनगर: गुजरात के भावनगर में लिव-इन पार्टनर की नृशंस हत्या के आरोपी को पुलिस द्वारा सरेआम पीटने और घसीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह घटना उस समय हुई जब पुलिस वारदात की कड़ियों को जोड़ने के लिए घटनास्थल पर ‘सीन री-क्रिएशन’ (वारदात का नाट्य रूपांतरण) करवा रही थी। वायरल वीडियो में आरोपी फैजल लखानी को रस्सियों से बांधकर सड़क पर घसीटते और पुलिसकर्मियों द्वारा लाठियों से बेरहमी से पीटते हुए साफ देखा जा सकता है। पुलिस की इस बर्बर कार्रवाई ने मानवाधिकार और कानूनी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘पुलिस की साख बचाने के लिए एक कदम आगे जाना पड़ा’

इस विवादास्पद कार्रवाई का बचाव करते हुए नीलमबाग थाने के पुलिस निरीक्षक डीपी उनाडकट ने अजीबोगरीब दलील दी है। पुलिस इंस्पेक्टर ने पिटाई को जायज ठहराते हुए कहा कि हत्या की क्रूरता और सोशल मीडिया पर पुलिस की छवि को पहुंचे नुकसान को देखते हुए खाकी को ‘एक कदम आगे’ बढ़ना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि सरेआम हुई इस वारदात के बाद जनता में यह गलत संदेश जा रहा था कि पुलिस असहाय हो चुकी है और अपराधी खुलेआम महिलाओं की हत्या कर रहे हैं। उनाडकट के अनुसार, जनता का भरोसा बहाल करने और अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए आरोपी के खिलाफ यह सख्त कदम उठाना जरूरी था।

देखें VIDEO-

फुटपाथ पर रहने वाली लिव-इन पार्टनर की कर दी थी हत्या

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, मृतका काजल बरैया और आरोपी फैजल लखानी पिछले सात वर्षों से भावनगर में फुटपाथ पर साथ रह रहे थे। फैजल आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से लूटपाट समेत कई संगीन मामले दर्ज हैं। हाल ही में जेल से छूटकर आने के बाद उसे शक हुआ कि काजल उसके एक परिचित रवि के संपर्क में है। इसी बात को लेकर गुरुवार को हुए खूनी विवाद में फैजल ने दोनों पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराई गई काजल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिसके बाद पुलिस ने शुक्रवार को फैजल को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था।

हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों और गृह विभाग के सर्कुलर की खुली अवहेलना

सरेआम हुई इस पिटाई ने गुजरात पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। गौरतलब है कि सूरत में पुलिस द्वारा आरोपियों की सार्वजनिक पिटाई के एक मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद राज्य के गृह विभाग ने 7 मई को एक विशेष सर्कुलर जारी कर आरोपियों को सार्वजनिक रूप से पीटने, घुटनों के बल चलाने या उठक-बैठक करवाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। सर्कुलर में स्पष्ट कहा गया था कि ऐसी गैर-कानूनी कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों और संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। अब भावनगर का यह वीडियो सामने आने के बाद गृह विभाग के दिशा-निर्देशों की सरेआम धज्जियां उड़ने पर कानूनी विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं।

VIDEO: Police publicly tied up, beat, and dragged the accused in a live-in partner’s murder case along the road