
न्यूयॉर्क: अमेरिकी सरकार द्वारा H-1B वीजा की आवेदन फीस में $100,000 (लगभग 83 लाख रुपये) की भारी बढ़ोतरी के ऐलान ने वैश्विक आईटी उद्योग में खलबली मचा दी है। इस फैसले से भारतीय आईटी कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों और प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव का भारतीय आईटी सेवा कंपनियों पर वित्तीय प्रभाव सीमित ही रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि यह खबर अल्पकालिक बाजार अस्थिरता पैदा कर सकती है, लेकिन कंपनियों के मुनाफे पर इसका कोई बड़ा और दीर्घकालिक असर पड़ने की संभावना नहीं है। इस सीमित प्रभाव के पीछे कई ठोस कारण हैं। सबसे पहले, यह अतिरिक्त फीस केवल नए H-1B वीजा आवेदनों पर और वह भी वित्त वर्ष 2027 से प्रभावी होगी, जबकि वित्त वर्ष 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।

साथ ही, यह बढ़ोतरी वर्तमान वीजा धारकों या वीजा के नवीनीकरण पर लागू नहीं होगी, जिससे इसका तत्काल वित्तीय प्रभाव लगभग न के बराबर हो जाता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय आईटी कंपनियों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता काफी कम कर दी है और अमेरिका में ‘लोकलाइजेशन’ (स्थानीय निवासियों को नौकरी देने) तथा उप-ठेकेदारी जैसे वैकल्पिक डिलीवरी मॉडल विकसित कर लिए हैं, जो उन्हें इस तरह के नीतिगत बदलावों से बचाते हैं।
देश की प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों ने इस फैसले का विश्लेषण करते हुए कहा है कि भारतीय आईटी कंपनियां इस चुनौती का सामना करने के लिए पहले से तैयार हैं।
CLSA: ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए का अनुमान है कि अगर कंपनियां बढ़ी हुई लागत को पूरी तरह खुद वहन करती हैं, तो भी उनके शुद्ध लाभ (Net Profit) पर वास्तविक प्रभाव केवल 1-3% के बीच ही रहेगा।
ICICI सिक्योरिटीज: फर्म ने माना कि इससे मार्जिन में लगभग 100 आधार अंकों का नुकसान हो सकता है, लेकिन कंपनियां इस लागत को कम करने के लिए निश्चित रूप से नए तरीके अपनाएंगी।
मोतीलाल ओसवाल: फर्म ने एक महत्वपूर्ण तथ्य पर प्रकाश डाला कि H-1B वीजा के लिए सबसे ज्यादा आवेदन भारतीय आईटी कंपनियों से नहीं, बल्कि गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनियों से आते हैं। स्थानीयकरण की रणनीति भारतीय कंपनियों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगी।
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज: नुवामा का मानना है कि कंपनियां इस लागत से निपटने के लिए अधिक कुशल स्टाफिंग मॉडल का उपयोग करेंगी, जिससे उनके मार्जिन और आय पर प्रभाव कम से कम होगा।
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