नई दिल्ली: अमेरिका में अवैध रूप से घुसने का सपना 149 भारतीय युवाओं के लिए एक बुरे सपने में बदल गया है। अमेरिकी प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए इन सभी भारतीयों को डिपोर्ट कर विशेष विमान से वापस भारत भेज दिया है। वापस लौटे इन युवाओं की हालत और उनकी आपबीती रोंगटे खड़े करने वाली है। ये सभी लोग अवैध तरीके से, जिसे आम भाषा में डंकी रूट कहा जाता है, का इस्तेमाल कर अमेरिका की सीमा में दाखिल हुए थे। हालांकि, वहां पहुंचते ही अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इन्हें हिरासत में ले लिया और अब कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन्हें वापस वतन भेज दिया गया है।
हाथ-पैरों में बेड़ियां और डिटेंशन सेंटर का नरक
वापस लौटे इन युवाओं में 15 करनाल के तो कुछ युवक पंजाब के भी बताए जा रहे हैं। वतन वापसी के बाद इन युवाओं ने जो दर्दनाक दास्तां सुनाई, उसने सभी को झकझोर कर रख दिया है। युवाओं ने आरोप लगाया कि पूरी यात्रा के दौरान उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक किया गया। उन्हें विमान में बैठाते और उतारते समय हाथों में हथकड़ियां और पैरों में बेड़ियां डालकर रखा गया था। हिरासत के दौरान डिटेंशन सेंटर्स में उन्हें अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कड़ाके की ठंड होने के बावजूद उन्हें ओढ़ने के लिए सिर्फ एक पतला सा कंबल दिया गया। खाने के नाम पर उन्हें दिन में सिर्फ दो बार भोजन मिलता था, जिसमें नाश्ते में महज 4 बन और शाम को थोड़ा सा राजमा-चावल दिया जाता था। डिपोर्ट किए गए अधिकतर युवा पंजाब और हरियाणा के करनाल व कैथल जिलों के रहने वाले हैं, जिन्होंने लाखों रुपये खर्च कर विदेश जाने का जोखिम उठाया था।
भारत सरकार ने जताई कड़ी आपत्ति
अपने नागरिकों के साथ हुए इस अमानवीय व्यवहार पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। भारत ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के साथ किए जा रहे कठोर व्यवहार और सामान्य नागरिकों को अपराधियों की तरह बेड़ियों में जकड़कर रखने पर सख्त एतराज जताया है। भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन से डिपोर्टेशन की प्रक्रिया के दौरान मानवाधिकारों का सम्मान करने और मानवीय गरिमा बनाए रखने की अपील की है।

The cruel face of America: 149 Indians were sent back in shackles; they shivered in the cold and longed




