सिरमौर: हिमाचल प्रदेश के जिला मुख्यालय नाहन में शुक्रवार को वाल्मीकि चौक के पास स्वागत द्वार की मरम्मत को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते भयानक हिंसक टकराव में तब्दील हो गया। दो समुदायों के बीच हुई भीषण पत्थरबाजी में सदर थाना प्रभारी (SHO) कुलबीर सिंह और एक महिला पुलिसकर्मी सहित कई पुलिस जवान घायल हो गए। एक पुलिस जवान की टांग में गंभीर चोट आई है, जबकि थाना प्रभारी के सिर पर चोट लगने की सूचना है। कुल मिलाकर संघर्ष में 20 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। घटना के दौरान महर्षि वाल्मीकि जी के स्मारक को नुकसान पहुंचाए जाने की बात सामने आने के बाद इलाके में तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया।
पुराने स्वागत द्वार की मरम्मत से भड़की चिंगारी, वाहनों पर भी बरसाए पत्थर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत वाल्मीकि चौक के निकट सिख समुदाय के पिछले वर्ष टूट चुके एक स्वागत द्वार की मरम्मत कार्य को लेकर हुई थी। बात बढ़ने पर दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक शुरू हुई और देखते ही देखते दोनों ओर से अंधाधुंध पत्थरबाजी और कांच की बोतलें फेंकी जाने लगीं। इस दौरान घटनास्थल से निकलने की कोशिश कर रहे एक निजी वाहन पर भी उपद्रवियों ने भारी पथराव किया, जिससे कई वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। स्थिति बेकाबू होते देख मौके पर दमकल विभाग की गाड़ी बुलाई गई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें (वाटर कैनन) छोड़ी गईं। दोनों पक्षों के कुछ प्रबुद्ध नागरिकों ने बीच-बचाव कर शांति की कोशिश की, लेकिन उपद्रवियों के आगे उनकी एक न चली।
रिजर्व फोर्स की तैनाती में देरी पर उठे सवाल, प्रशासन की लचर व्यवस्था पर घिरी पुलिस
इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन और पुलिस की खुफिया व सुरक्षा तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ यह टकराव घंटों तक खिंचता रहा। स्थानीय लोगों का सवाल है कि शुरुआती दौर में ही तनाव बढ़ने के बावजूद अतिरिक्त पुलिस बल समय पर क्यों नहीं पहुंचा। सिरमौर के नजदीक आईआरबी (IRB) की छठी बटालियन की मौजूदगी के बावजूद रिजर्व फोर्स को तैनात करने में हुई देरी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मौके पर सीमित पुलिस बल, डीएसपी शक्ति सिंह और घायल थाना प्रभारी के साथ हालात संभालता दिखा, जिससे पर्याप्त संसाधनों और सुरक्षा बल की कमी साफ उजागर हुई।
नेशनल हाईवे-907A पर 3 घंटे ठप रहा पहिया, मेडिकल आपात सेवाओं पर भी संकट
इस हिंसक झड़प का सीधा असर शहर और अंतरराज्यीय यातायात व्यवस्था पर पड़ा। नाहन से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-907ए (NH-907A) पर दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप रही। शिमला और चंडीगढ़ जाने वाले मार्गों पर कई किलोमीटर लंबी गाड़ियों की कतारें लग गईं, जिससे सैकड़ों मुसाफिर घंटों फंसे रहे। मेडिकल कॉलेज वाले शहर में इस तरह मुख्य मार्ग बंद रहने के दौरान आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग न बनाए जाने को लेकर भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
एसडीएम पहुंचे मौके पर, दोषियों की निष्पक्ष पहचान और जांच की मांग
हालात का जायजा लेने एसडीएम नाहन भी प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे। हालांकि, रिजर्व फोर्स की तैनाती और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक रुख आना अभी बाकी है। शांतिप्रिय नागरिकों का कहना है कि चंद असामाजिक तत्वों के कारण पूरे समुदाय को दोषी ठहराने के बजाय सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के जरिए उन उपद्रवियों की निष्पक्ष पहचान की जानी चाहिए, जिन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और धार्मिक स्मारक को नुकसान पहुंचाया। इलाके में एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात रखा गया है।


Bloody clash between two communities, Lord Valmiki’s memorial vandalized, stones and bottles hurled




