जालंधर: पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) पंजाब के ताजा आंकड़ों ने शिक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी है। राज्य के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में प्रिंसिपलों के 57 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं, जिसका सीधा खामियाजा छात्रों की पढ़ाई और स्कूलों के कामकाज पर पड़ रहा है।
बिना मुखिया के चल रहे 1113 स्कूल
DTF के लुधियाना जिला प्रधान दलजीत सिंह समराला और सचिव हरजीत सिंह सुधार ने इस संबंध में हैरान करने वाले आंकड़े पेश किए हैं। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पंजाब भर में कुल 1,927 सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं, लेकिन इनमें से 1,113 स्कूलों में कोई नियमित प्रिंसिपल ही तैनात नहीं है। बिना मुखिया के इन स्कूलों का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।
इन जिलों में हालात सबसे ज्यादा खराब
संगठन के आंकड़ों पर गौर करें तो शहीद भगत सिंह (SBS) नगर जिले में स्थिति सबसे अधिक दयनीय है। यहां स्वीकृत 52 पदों में से 45 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह मानसा जिले में 73 में से केवल 10 स्कूलों में ही प्रिंसिपल मौजूद हैं। तरनतारन और बरनाला में करीब 80 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जबकि मोगा, कपूरथला और जालंधर जैसे प्रमुख जिलों के लगभग 70 प्रतिशत सरकारी स्कूल बिना नियमित प्रिंसिपल के ही संचालित किए जा रहे हैं।
लुधियाना में भी आधे से ज्यादा पद खाली
राज्य के सबसे बड़े जिले लुधियाना का हाल भी कुछ अलग नहीं है। यहां 181 स्वीकृत प्रिंसिपल पदों में से 101 पद खाली पड़े हैं, जो जिले के कुल पदों का 55.8 प्रतिशत है। यदि पूरे पंजाब का औसत निकाला जाए तो रिक्त पदों का यह आंकड़ा 57.75 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
सरकार के दावों पर उठे गंभीर सवाल
स्कूलों के इस बदतर हालात पर गहरी चिंता जताते हुए DTF नेताओं ने पंजाब सरकार की शिक्षा क्षेत्र में उपलब्धियों पर कड़े सवाल दागे हैं। उनका कहना है कि जब स्कूलों में प्रिंसिपल, हेडमास्टर, लेक्चरर, मास्टर कैडर और प्राथमिक शिक्षकों के हजारों पद ही खाली पड़े हैं, तो शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बताने वाले दावे वास्तविकता से कोसों दूर हैं। शिक्षकों और स्टाफ की इस भारी कमी के कारण स्कूलों का शैक्षणिक माहौल बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।


Punjab’s education claims are exposed, 1,113 government schools have no principals








