पटियाला/जालंधर: पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के कर्मचारियों की 21 जुलाई से चल रही हड़ताल पर सख्ती दिखाते हुए मैनेजमेंट ने अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है। सामूहिक छुट्टी (मास लीव) लेकर हड़ताल पर गए कर्मचारियों पर नकेल कसने के लिए बिजली निगम के प्रबंधन ने ‘नो वर्क, नो पे’ यानी काम नहीं तो वेतन नहीं का सख्त नियम लागू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। लगातार पांच दिनों से कामकाज ठप होने के कारण पूरे प्रदेश में बिजली सप्लाई व्यवस्था पर भारी असर पड़ रहा है और उपभोक्ताओं की शिकायतों का अंबार लग गया है, जिसके बाद प्रबंधन को यह कड़ा अल्टीमेटम जारी करना पड़ा है।
सैलरी कटवाने या काम पर लौटने की दो टूक चेतावनी
पीएसपीसीएल प्रबंधन ने कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जो भी मुलाजिम मास लीव लेकर हड़ताल में शामिल रहेगा, उसका वेतन तत्काल प्रभाव से काट लिया जाएगा। मैनेजमेंट ने साफ कहा है कि जो कर्मचारी चाहते हैं कि उनकी सैलरी न कटे, वे बिना किसी देरी के तुरंत अपनी ड्यूटी पर लौट आएं। इस सख्त आदेश के बाद फील्ड से लेकर दफ्तरों तक हड़ताली कर्मचारियों में खलबली मच गई है। हालांकि, कर्मचारी संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उन्होंने 26 जुलाई तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है, जिसे आगे और बढ़ाने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
पांच दिनों से कामकाज ठप, जेल भरो आंदोलन से दबाव
पीसेबी एम्पलाइज ज्वाइंट फोरम, बिजली मुलाजिम एकता मंच पंजाब, एसोसिएशन ऑफ जूनियर इंजीनियर्स, ग्रिड सब-स्टेशन एम्पलाइज यूनियन और पावरकॉम एंड ट्रांसको पेंशनर्स यूनियन समेत कई सहयोगी संगठनों से जुड़े हजारों कर्मचारी लगातार छह दिन से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों ने पहले 21 से 24 जुलाई तक सामूहिक अवकाश का ऐलान किया था, लेकिन मांगों पर मैनेजमेंट के साथ सहमति न बनने के बाद इसे 25 और 26 जुलाई तक बढ़ा दिया गया। पिछले पांच दिनों से प्रदेश भर के पीएसपीसीएल और पीएसटीसीएल कार्यालयों में भारी रोष प्रदर्शन चल रहे हैं। इसके साथ ही, पेंशनर्स विंग की ओर से ‘जेल भरो आंदोलन’ जैसी गतिविधियों के जरिए सरकार और प्रबंधन पर लगातार भारी दबाव बनाया जा रहा है।
चरमराई बिजली व्यवस्था से प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती
कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर जाने से प्रशासनिक व्यवस्था और फील्ड का कामकाज पूरी तरह चरमरा गया है। दफ्तरों और ग्रिड सब-स्टेशनों पर तकनीकी व लिपिकीय कामकाज रुकने से आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कई मामलों में घंटों तक शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा है। मैनेजमेंट का मानना है कि यदि इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण नहीं पाया गया, तो पूरे राज्य में बिजली सप्लाई को सुचारू रखना और नियमित कार्यप्रणाली को जारी रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसी प्रशासनिक मजबूरी और आम जनता की व्यवस्था को पटरी पर रखने के उद्देश्य से प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाते हुए वेतन काटने का यह सख्त फैसला लिया है।


Punjab electricity workers’ strike sparks uproar after ‘no work, no pay’ ultimatum issued








