अमृतसर: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर चल रहे संघर्ष को और धार दे दी है। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा 21 अगस्त को बुलाए गए बंद का पूर्ण रूप से समर्थन करने की घोषणा की है। इस कड़े फैसले के बाद सिख समुदाय की इस पुरानी मांग को एक मजबूत मंच मिल गया है। इस समर्थन के चलते एसजीपीसी ने अपने सभी संस्थानों को बंद रखने और अपनी पूर्व निर्धारित अहम बैठक की तारीख में बड़ा बदलाव करने का भी निर्णय लिया है।
अंतरिम कमेटी की बैठक की तारीख में हुआ बदलाव
बंद के इस बड़े ऐलान के कारण शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को अपने प्रशासनिक कार्यक्रमों में भी तुरंत बदलाव करना पड़ा है। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले अंतरिम कमेटी की बैठक 21 अगस्त को होनी तय थी, लेकिन अब यह बैठक 22 अगस्त को सुबह 11 बजे अमृतसर स्थित एसजीपीसी के मुख्य कार्यालय में आयोजित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंदी सिंहों की रिहाई के लिए कमेटी लगातार प्रयास कर रही है और इस न्याय की लड़ाई में वह कौमी इंसाफ मोर्चा के साथ पूरी तरह से खड़ी है।
सरकार को समझनी चाहिए सिख समुदाय की भावनाएं
धामी ने सरकार के रवैये पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को बंदी सिंहों की रिहाई के मामले में सिख समुदाय की गहरी भावनाओं को समझना चाहिए। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इस अहम मुद्दे पर संघर्ष करने वाले लोगों की आवाज को जबरन दबाने का प्रयास कर रही है, जिसका हर स्तर पर कड़ा विरोध किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह मुद्दा लंबे समय से सिख कौम की सबसे प्रमुख मांगों में से एक रहा है।
21 अगस्त को पूरी तरह बंद रहेंगे एसजीपीसी के सभी संस्थान
एसजीपीसी अध्यक्ष ने इस बात को फिर से दोहराया कि उनकी संस्था बंदी सिंहों की रिहाई के लिए पहले भी सरकारों के सामने पुरजोर तरीके से आवाज उठाती रही है और भविष्य में भी यह दबाव जारी रहेगा। उन्होंने साफ किया कि 21 अगस्त को बुलाए गए बंद के समर्थन में एसजीपीसी का मुख्य कार्यालय और इसके अधीन आने वाले सभी शिक्षण व अन्य संस्थान पूरी तरह से बंद रहेंगे, ताकि बंदी सिंहों की रिहाई की मांग मजबूती से सरकार के कानों तक पहुंच सके।


Punjab bandh announced for August 21; SGPC extends full support; all establishments to remain closed.




