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पंजाब में अंधेरे का संकट टला, मान सरकार के आश्वासन के बाद बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म; काम पर लौटे कर्मचारी

जालंधर: पंजाब में भीषण गर्मी और बिजली संकट के बीच आम जनता के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले एक हफ्ते से पूरे राज्य में बिजली आपूर्ति और मरम्मत कार्य को प्रभावित करने वाली पावरकॉम (PSPCL) कर्मचारियों की हड़ताल आखिरकार सोमवार तड़के समाप्त हो गई है। पंजाब सरकार द्वारा कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित वित्तीय मांगों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के ठोस आश्वासन के बाद यह बड़ा निर्णय लिया गया है। हड़ताल खत्म होते ही काम पर लौटे कर्मचारियों ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में ठप पड़ी बिजली आपूर्ति और फॉल्ट ठीक करने का काम तेजी से शुरू कर दिया है।

वित्त मंत्री हरपाल चीमा के साथ मैराथन बैठक में बनी सहमति

बिजली कर्मचारियों की संयुक्त समन्वय समिति (ज्वाइंट कोआर्डिनेशन कमेटी) और पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के बीच हुई एक मैराथन बैठक के बाद आंदोलन वापस लेने का आधिकारिक ऐलान किया गया। कर्मचारी प्रतिनिधियों के अनुसार, वित्त मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया है कि उनकी वित्तीय मांगों का अध्ययन करने के लिए गठित विशेष समिति 31 जुलाई तक अपनी अंतरिम रिपोर्ट और 15 अगस्त तक अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। यह समिति मैनेजमेंट को यह सिफारिश करेगी कि कर्मचारियों की मांगों को किस प्रकार और किस रूप में लागू किया जाए।

2011 के बाद भर्ती कर्मचारियों को मिलेगी बिजली बिल में रियायत

सरकार के साथ हुई इस बातचीत में कर्मचारियों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। साल 2011 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को बिजली बिलों में रियायत देने की मांग को मैनेजमेंट ने स्वीकार कर लिया है। कर्मचारियों के मुताबिक, पावरकॉम बोर्ड मैनेजमेंट ने इन कर्मचारियों को भी बिजली रियायत सुविधा का लाभ देने पर सहमति जता दी है, जिससे पिछले कई सालों से चला आ रहा एक बड़ा विवाद हमेशा के लिए सुलझ गया है।

छठे दिन खत्म हुआ आंदोलन, ग्रामीण इलाकों में लोग रहे सबसे ज्यादा परेशान

यह हड़ताल अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुकी थी, जिसमें लाइनमैन और सहायक लाइनमैन सहित लगभग पूरा तकनीकी स्टाफ शामिल रहा। इन कर्मचारियों के काम पर न होने के कारण राज्य भर में, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में फॉल्ट ठीक करने का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ था। तकनीकी खराबी के बाद लोगों को कई घंटों तक बिना बिजली के भारी उमस का सामना करना पड़ा। हालांकि, अब स्टाफ के लौटने से बिजली मरम्मत कार्यों में फिर से गति आ गई है।

‘समान काम, समान वेतन’ और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की थी मांग

यूनियन की सबसे मुख्य मांग ‘समान काम, समान वेतन’ के सिद्धांत को लागू करने की थी। कर्मचारी नेताओं का आरोप था कि एक जैसा काम करने के बावजूद भर्ती के तरीके और श्रेणी के आधार पर वेतन में बड़ा भेदभाव किया जा रहा था। इसके अलावा, यूनियन हजारों आउटसोर्स और अनुबंध (कच्चे) कर्मचारियों को पक्का करने की भी पुरजोर मांग कर रही थी, जो लंबे समय से कम वेतन और बिना किसी सेवा लाभ के पक्के कर्मचारियों के बराबर तकनीकी सेवाएं दे रहे हैं।

बिजली मंत्री से वार्ता रही थी विफल, अफसरों ने संभाला था मोर्चा

गौरतलब है कि इससे पहले शनिवार को बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद और हड़ताली यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच करीब छह घंटे तक चली लंबी बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई थी। हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति सुचारू रखने के लिए मैनेजमेंट को भारी मशक्कत करनी पड़ी। तकनीकी अनुभव न होने के बावजूद लिपिक (क्लेरिकल) और अकाउंट्स स्टाफ से फीडर संचालन की निगरानी करवाई गई। वहीं, एक्सईएन (XEN), एसडीओ (SDO) और जेई (JE) ने अतिरिक्त शिफ्टों में काम करके सीमित आउटसोर्स कर्मचारियों की मदद से किसी तरह आपातकालीन सेवाएं बहाल रखीं।

‘नो वर्क, नो पे’ की चेतावनी वापस, यूनियनों की रहेगी सरकार पर नजर

हड़ताल के दौरान पावरकॉम मैनेजमेंट ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि काम पर न लौटने वाले कर्मचारियों पर ‘नो वर्क, नो पे’ (काम नहीं तो वेतन नहीं) का नियम लागू किया जाएगा। हालांकि, वित्त मंत्री के साथ हुए समझौते और आश्वासनों के बाद अब हड़ताल में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ यह नियम लागू नहीं किया जाएगा। वहीं, कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के आश्वासनों के क्रियान्वयन पर पैनी नजर रखेंगे और उम्मीद करते हैं कि तय समय सीमा के भीतर सभी वादे पूरे किए जाएंगे।

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