चंडीगढ़: मानसा के चर्चित नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के शव का पोस्टमार्टम शनिवार को एक बार फिर तकनीकी दिक्कतों के चलते टल गया। पीजीआई चंडीगढ़ में फॉरेंसिक डॉक्टरों के बोर्ड ने सुबह 10 बजे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। पीजीआई सूत्रों के मुताबिक, कई दिनों से शव को फ्रीजर में रखे जाने के कारण शरीर अंदरूनी तौर पर पूरी तरह से जम चुका है और बेहद सख्त हो गया है। इस वजह से डॉक्टरों के लिए आंतरिक अंगों का चीर-फाड़ व परीक्षण करना संभव नहीं हो पा रहा है।
शव को हीट देकर सामान्य करने में जुटे डॉक्टर, दोपहर बाद दोबारा होगा प्रयास
अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉक्टरों की टीम अब विशेष चिकित्सीय तकनीक से शव को सामान्य तापमान और हीट देकर उसके आंतरिक ऊतकों को ढीला करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। इसके सामान्य होने के बाद ही फॉरेंसिक जांच आगे बढ़ सकेगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और दोपहर करीब 12 बजे के बाद एक बार फिर पोस्टमार्टम प्रक्रिया को सिरे चढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने और रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही शव परिजनों को सौंपा जाएगा, जिसके बाद पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए मानसा ले जाया जाएगा।
PGI में डीएसपी समेत भारी पुलिस बल तैनात, मालवा के तीन जिलों में अलर्ट
झोटा के संवेदनशील मामले को देखते हुए चंडीगढ़ पीजीआई में पंजाब पुलिस के डीएसपी रैंक के अधिकारियों सहित भारी पुलिस बल तैनात है। जब तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया मुकम्मल नहीं हो जाती और शव का अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न नहीं होता, तब तक पुलिस और नागरिक प्रशासन की सांसें अटकी हुई हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मानसा, बठिंडा और फरीदकोट जिलों की पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जबकि पुलिस के आला अधिकारी पल-पल की गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
सरकार द्वारा मांगें माने जाने के बाद स्थगित होगा ‘झोटा इंसाफ मोर्चा’
दूसरी ओर, पंजाब सरकार द्वारा परिजनों और संघर्ष कमेटी की लगभग सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिए जाने के बाद ‘झोटा इंसाफ मोर्चा’ को स्थगित करने की तैयारी कर ली गई है। मोर्चे से जुड़े प्रमुख नेताओं के अनुसार, पोस्टमार्टम और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मोर्चा स्थगित करने की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। हालांकि, मोर्चा प्रबंधकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे आंदोलन को पूरी तरह समाप्त नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसे केवल टाल रहे हैं। यदि भविष्य में सरकार ने अपने वादों और लिखित समझौतों को लागू करने में कोई कोताही बरती, तो संघर्ष का बिगुल दोबारा फूंका जा सकता है।




Post-mortem of Parvinder Jhota’s body stalled once again; the body has stiffened after remaining in a freezer




