अमृतसर: भारत से पाकिस्तान के सिंध प्रांत स्थित जैकोबाबाद के ऐतिहासिक गुरुद्वारे के लिए श्रद्धा स्वरूप भेजी गई पवित्र पालकी साहिब को पाकिस्तानी अधिकारियों ने सीमा में दाखिल होने से रोक दिया। अटारी-वाघा संयुक्त जांच चौकी (ICP) पर करीब सात घंटे तक चले लंबे इंतजार और विचार-विमर्श के बाद भी पाकिस्तानी कस्टम व आव्रजन अधिकारियों ने पालकी साहिब को सीमा पार ले जाने की आधिकारिक अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। इसके चलते पवित्र पालकी साहिब को लेकर गया विशेष ट्रक शनिवार शाम निराश होकर वापस भारतीय सीमा में लौट आया।
जैकोबाबाद के सिंह सभा गुरुद्वारे के लिए दानकर्ता ने भेजी थी पालकी साहिब
जानकारी के अनुसार, भारत के एक श्रद्धालु दानकर्ता ने पाकिस्तान के जैकोबाबाद स्थित शाह गाजी मोहल्ला के गुरुद्वारा सिंह सभा के लिए यह सुंदर पालकी साहिब भेंट स्वरूप तैयार करवाई थी। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन प्रकाश और सेवा-संभाल के लिए उपयोग में लाई जाने वाली इस नक्काशीदार पालकी साहिब को विशेष सुरक्षा व सम्मान के साथ एक ट्रक के जरिए अटारी अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पहुंचाया गया था। भारतीय सीमा शुल्क और सुरक्षा एजेंसियों ने जरूरी वैधानिक दस्तावेजों की पड़ताल कर अपनी तरफ से सभी औपचारिकताएं समय रहते पूरी कर ली थीं।
उच्चाधिकारियों से मंजूरी का बहाना बनाकर सात घंटे कराया इंतजार, फिर किया इनकार
प्रत्यक्षदर्शियों और सीमा पर मौजूद सेवादारों के मुताबिक, भारतीय जांच चौकी से मंजूरी मिलने के बाद जैसे ही वाहन सीमा पार प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ा, पाकिस्तानी कस्टम अधिकारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति प्राप्त करने का हवाला देकर प्रक्रिया रोक दी। इसके चलते ट्रक चालक और पालकी साहिब की देखरेख में गए सेवादारों को सीमा पर लगभग छह से सात घंटे तक बिना किसी स्पष्ट जवाब के इंतजार करना पड़ा। अंततः शाम को पाकिस्तानी पक्ष ने किसी भी प्रकार की आधिकारिक छूट या प्रवेश देने से मना कर दिया, जिसके बाद मजबूरन वाहन को वापस भारत मोड़ना पड़ा।
अब सिख जत्थे के साथ पालकी साहिब भेजने का किया जाएगा प्रयास
पहचान उजागर न करने की शर्त पर पालकी साहिब भेजने वाले दानकर्ता ने बताया कि भारतीय अधिकारियों का रवैया बेहद सहयोगात्मक था, लेकिन पाकिस्तान सरकार और सीमा अधिकारियों के अड़ियल रुख के कारण पालकी साहिब को सीमा पार प्रवेश नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब में पालकी साहिब की अत्यंत आवश्यकता है, इसलिए अब आगामी दिनों में धार्मिक पर्वों के अवसर पर पाकिस्तान जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के आधिकारिक जत्थे के साथ इसे भिजवाने के नए सिरे से कूटनीतिक और प्रशासनिक प्रयास किए जाएंगे।




Pakistan creates an obstacle at the Attari-Wagah border, turns back the ‘Palki Sahib’ (palanquin) intended




