जालंधर: शहर के नगर निगम की हाउस बैठक सोमवार को उस समय भारी हंगामे और राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई, जब मेयर वनीत धीर ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 569.40 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पेश किया। बजट के सदन पटल पर आते ही विपक्षी दल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षदों ने शून्य काल (जीरो आवर) शुरू करने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
शून्य काल की मांग पर अड़ा रहा विपक्ष
विपक्षी पार्षदों का स्पष्ट कहना था कि इतनी बड़ी धनराशि का बजट पेश करने से पहले सदन में शून्य काल होना चाहिए, ताकि जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा की जा सके। विपक्ष का आरोप था कि उनकी इस मांग को पूरी तरह से नजरअंदाज करके सीधे बजट प्रस्तुत कर दिया गया। इसी बात से नाराज दोनों दलों के पार्षदों ने अपनी सीटों से उठकर कड़ा विरोध जताना शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
महज ढाई मिनट में ही पास कर दिया गया करोड़ों का बजट
सदन में हो रहे भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच नगर निगम प्रशासन ने हैरान करने वाली तेजी दिखाई। प्रशासन ने विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद महज ढाई मिनट के भीतर ही इस पूरे बजट को पारित कर दिया। प्रशासन की इस जल्दबाजी को लेकर विपक्ष ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे पूरी तरह से अलोकतांत्रिक तथा लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ उठाया गया कदम बताया है।
विकास कार्यों पर 200 करोड़, जानिए बजट का पूरा गणित
मेयर वनीत धीर द्वारा पारित किए गए 569.40 करोड़ रुपये के इस बजट में शहर के बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया गया है। शहर के विकास कार्यों जैसे सड़कों की मरम्मत, सीवरेज, पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं को सुचारू बनाने के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, 312.70 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों के संचालन और प्रशासनिक कार्यों के लिए रखे गए हैं, जबकि 55.56 करोड़ रुपये अन्य खर्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं। मेयर ने स्पष्ट किया कि निगम की आय में सुधार हुआ है, जिसके चलते विकास कार्यों को इस बजट में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
विरोध के बीच शुरू हुआ शून्य काल, शहर की राजनीति गरमाई
बजट के आनन-फानन में पास होने के बाद हाउस में अंततः शून्य काल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, लेकिन विपक्ष का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उनका विरोध लगातार जारी रहा। विपक्षी पार्षदों ने गंभीर आरोप लगाया कि सदन में उनकी आवाज को जानबूझकर दबाया गया है और शहर की जनता से जुड़े असल मुद्दों पर चर्चा का कोई अवसर नहीं दिया गया। बैठक के दौरान हुए इस भारी विवाद के चलते जालंधर का राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की पूरी संभावना है।

Major Uproar at Jalandhar Municipal Corporation: Opposition Continues Chanting Slogans as 569 Crore




