चंडीगढ़: पंजाब में आगामी चुनावों से ठीक पहले एक ऐसी राजनीतिक हलचल हुई है, जिसने बड़े-बड़े सियासी पंडितों को भी हैरत में डाल दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को एक पत्र लिखकर बब्बर खालसा के खूंखार आतंकी और पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता जगतार सिंह हवारा के लिए 10 दिन की पैरोल मांगी है। हवारा कोई आम कैदी नहीं है, बल्कि पंजाब के सबसे काले दौर से जुड़ा एक ऐसा नाम है, जिस पर दांव खेलकर राजनीतिक दल पंथक वोटों को साधने की जुगत में लगे हैं।
चुनाव और 31वीं बरसी की टाइमिंग पर उठ रहे सवाल
जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल ऐसे समय में मांगी गई है जब पंजाब में चुनाव सिर पर हैं और इसी महीने 31 अगस्त को बेअंत सिंह हत्याकांड को पूरे 31 साल होने जा रहे हैं। हवारा पंजाब में दो अलग-अलग नैरेटिव का प्रतिनिधित्व करता है। एक तरफ उसने 31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की बम धमाके में बेरहमी से जान ले ली थी। वहीं दूसरी तरफ, एक खास वर्ग उसे कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे गए सिख युवाओं का बदला लेने वाले के रूप में देखता है। चुनाव से ठीक पहले पंथक पार्टियां इसी नैरेटिव के जरिए अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में हैं और सीएम मान के इस कदम को भी इसी चश्मे से देखा जा रहा है।
कौन है जगतार हवारा और क्या थी साजिश?
जगतार सिंह हवारा प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का एक प्रमुख ऑपरेटिव रहा है। उसे बेअंत सिंह हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ताओं और योजनाकारों में गिना जाता है। उसी के निर्देश पर दिलावर सिंह ने मानव बम (सुसाइड बॉम्बर) बनकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था, जिसने पंजाब में दो दशक तक चले आतंकवाद के काले दौर का अंत किया। साल 2007 में अदालत ने हवारा को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे 2010 में उम्रकैद में बदल दिया गया। वर्तमान में वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। 2015 में ‘सरबत खालसा’ द्वारा उसे अकाल तख्त का जत्थेदार भी घोषित किया गया था, जिसके बाद से उसके समर्थक एसजीपीसी के साथ सीधे टकराव में रहते हैं।
90 फुट लंबी सुरंग और 2004 का सनसनीखेज जेल ब्रेक
हवारा का नाम सिर्फ बेअंत सिंह की हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत के सबसे सनसनीखेज जेल ब्रेक कांड का भी मास्टरमाइंड है। 2004 में हवारा ने अपने साथी आतंकियों जगतार सिंह तारा और परमजीत सिंह भ्योरा के साथ मिलकर चंडीगढ़ की हाई-सिक्योरिटी बुड़ैल जेल में 90 फुट लंबी सुरंग खोदी थी और वहां से चकमा देकर फरार हो गया था। हालांकि, बाद में सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे 2005 में दिल्ली से दोबारा गिरफ्तार कर लिया। वहीं भ्योरा को 2006 में और तारा को 2015 में थाईलैंड से पकड़ा गया था।
साजिश में शामिल अन्य आतंकियों का क्या हुआ?
बेअंत सिंह हत्याकांड में पुलिस ने हवारा के अलावा बलवंत सिंह राजोआणा, जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भ्योरा, लखविंदर सिंह, शमशेर सिंह और गुरमीत सिंह को भी गिरफ्तार किया था। पंजाब पुलिस का पूर्व सिपाही बलवंत सिंह राजोआणा इस हमले में बैकअप सुसाइड बॉम्बर था। उसने खुलेआम अपना गुनाह कबूला और अपने लिए किसी भी तरह का कानूनी बचाव लेने से इनकार कर दिया। राजोआणा फिलहाल पटियाला सेंट्रल जेल में फांसी की सजा का इंतजार कर रहा है (जिस पर फिलहाल रोक लगी है)। वहीं, तारा चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में, भ्योरा तिहाड़ में और अन्य तीनों आतंकी (लखविंदर, शमशेर, गुरमीत) बुड़ैल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।


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