फतेहगढ़ साहिब: सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की भक्ति में लीन कांवड़ियों की आस्था उस वक्त गहरे मातम में तब्दील हो गई, जब गंगोत्री से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे उनके जत्थे पर एक तेज रफ्तार कार काल बनकर टूट पड़ी। सरहिंद-मंडी गोबिंदगढ़ हाईवे पर रात के अंधेरे में हुए इस रोंगटे खड़े कर देने वाले सड़क हादसे में तीन कांवड़ियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि एक अन्य की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। ये सभी कांवड़िए शिवरात्रि के पावन पर्व के लिए गंगोत्री से डाक कांवड़ लेकर फरीदकोट के कोटकपूरा लौट रहे थे, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही यह खौफनाक हादसा हो गया।
टक्कर इतनी भयंकर थी कि सड़क पर दूर तक बिखर गए शव
हादसा हाईवे पर उस वक्त हुआ जब कांवड़िए सड़क के किनारे-किनारे पैदल चल रहे थे। तभी पीछे से आ रही एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। चश्मदीदों और साथ चल रहे जत्थे के सदस्यों के मुताबिक, टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीनों युवकों की लाशें सड़क पर दूर-दूर तक छिटक गईं। घटना के तुरंत बाद चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर लंबा जाम लग गया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और चारों को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तीन को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सोमवार को घर पहुंचनी थी कांवड़, अब उठेंगी अर्थियां
इस हादसे ने पूरे कोटकपूरा शहर में शोक की लहर दौड़ा दी है, क्योंकि सभी मृतक वहीं के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान डॉक्टर हरपाल गली निवासी 40 वर्षीय जगदीश मित्तल, हरीनौ रोड निवासी 43 वर्षीय महेंद्र पाल और सुरगापुरी निवासी 42 वर्षीय दीपक कुमार के रूप में हुई है। वहीं, कोटकपूरा के ही सरकारी गर्ल स्कूल के पास रहने वाले मुकेश गोयल इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। शिव त्रिलोकी नाथ कांवड़ संघ के साथ गए पीबीजी वेलफेयर क्लब के प्रधान राजीव मलिक ने बताया कि ये शिवभक्त 30 जुलाई को गंगोत्री के लिए रवाना हुए थे और उन्हें 10 अगस्त, सोमवार को डाक कांवड़ लेकर अपने शहर लौटना था।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस दुखद घटना ने कई परिवारों को हमेशा के लिए गहरे जख्म दे दिए हैं। मृतकों में शामिल महेंद्र पाल और जगदीश मित्तल दोनों ही पेशे से बिजली मैकेनिक थे। महेंद्र पाल अपने पीछे बुजुर्ग पिता, पत्नी और एक 15 साल की बेटी को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं। वहीं, जगदीश मित्तल अविवाहित थे और परिवार में बिल्कुल अकेले थे, क्योंकि उनके माता-पिता का साया पहले ही उनके सिर से उठ चुका था। कोटकपूरा के प्राचीन डेरा दूधाधारी और श्री रामबाग मंदिर से निकले इन जत्थों के सदस्यों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी यह धार्मिक यात्रा इतने दर्दनाक मोड़ पर आकर खत्म होगी।


In Punjab, a speeding car ruthlessly mowed down four Shiva devotees carrying ‘Dak Kanwar’




