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जालंधर: थाने से चंद कदम दूर 2 दिन लावारिस पड़ा रहा शव; सीमा विवाद में उलझी रही पुलिस, वकील के हस्तक्षेप पर जागी

जालंधर: जालंधर के सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाके मिलाप चौक के पास मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ सड़क किनारे एक 55 वर्षीय व्यक्ति का शव पिछले दो दिनों से संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा रहा। हैरानी और प्रशासनिक लापरवाही की हद तो यह है कि घटनास्थल से थाना डिवीजन नंबर 3 महज कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित है, लेकिन पुलिस शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई करने के बजाय घंटों तक ‘यह मेरा इलाका नहीं है’ (सीमा विवाद) के तर्क में उलझी रही। शहर के बीचों-बीच दो दिन तक शव का पड़े रहना पुलिस की गश्त और सतर्कता के दावों की पोल खोलता है।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय एडवोकेट अशोक शर्मा को किसी राहगीर ने फोन पर सूचना दी कि सड़क पर एक व्यक्ति मृत अवस्था में पड़ा है और उसे कोई उठाने वाला नहीं है। एडवोकेट शर्मा ने जब इस बाबत पास ही स्थित थाना डिवीजन नंबर 3 को सूचित किया, तो पुलिस ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र (हद) में नहीं आता। इसके बाद जब थाना डिवीजन नंबर 4 से संपर्क किया गया, तो वहां से भी यही रटा-रटाया जवाब मिला। एडवोकेट ने पुलिस की इस संवेदनहीनता पर गहरा रोष जताते हुए कहा कि कानून में ‘जीरो नंबर एफआईआर’ का प्रावधान है, जिसके तहत पुलिस को पहले पीड़ित की सुध लेनी चाहिए, न कि फीता लेकर सीमा नापनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि अगर समय रहते शव को नहीं उठाया जाता, तो आवारा कुत्ते उसे नुकसान पहुंचा सकते थे।

मामले के तूल पकड़ने और एडवोकेट के कड़े रुख के बाद अंततः थाना 4 के एएसआई हीरा लाल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने शव की जांच की और बताया कि मृतक प्रथम दृष्टया कोई भिखारी प्रतीत होता है, जिसकी उम्र करीब 55 वर्ष है। हालांकि, मौके पर पहुंचकर भी एएसआई ने स्पष्ट किया कि उनकी जानकारी के मुताबिक यह इलाका थाना 3 के अंतर्गत आता है, फिर भी मानवता के नाते उन्होंने थाना 3 की पुलिस को सूचित किया और उनके आने तक वहां डटे रहे। तलाशी के दौरान मृतक के पास से कोई पहचान पत्र नहीं मिला है। पुलिस का मानना है कि व्यक्ति की मौत बीमारी के चलते हुई हो सकती है।

इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और वकीलों का कहना है कि पुलिस का काम जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन यहाँ पुलिस आपसी सीमा विवाद में इतनी उलझ गई कि एक इंसान के शव की गरिमा का भी ख्याल नहीं रखा गया। बड़ा सवाल यह है कि जिस जगह से पुलिस और प्रशासन के अधिकारी दिन-रात गुजरते हैं, वहां दो दिन तक किसी की नजर शव पर क्यों नहीं गई? फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पहचान के लिए सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

Jalandhar: A body lay unclaimed for two days just a few steps away from the police station; the police remained preoccupied with a border dispute.