जालंधर (अमन बग्गा): वर्ल्ड ऑटिज्म डे पर बच्चों को ऑटिज्म से अवगत करने के लिए डिप्स स्कूल अर्बन एस्टेट में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों और टीचर्स ने मिलकर ऑटिज्म के स्टीकर्स बनाए और उन्हें कलर किए। बच्चों ने यह स्टीकर प्रिंसिपल मीनाक्षी मेहता को लगा कर स्कूल के पूरे स्टाफ को लगाए।
टीचर्स ने बच्चों को बताया कि इससे पीढ़ित बच्चों और लोगों को संचार करने में दिक्कत, उनके बर्ताव में दोहराव, दूसरों की बातों को दोहराना, बोलना देरी से सीखना आदि लक्षण होते है। हर साल इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद लोगों को इस बारे में जागरूक करना और उन लोगों को स्पोर्ट करना जो इससे जूझ रहे है।सीनियर क्लास के बच्चों ने बताया कि मेडिकल भाषा में इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर कहते है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे एक-दूसरे से काफी अलग होते है। इस बीमारी को इलाज से दूर किया जा सकता है। शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार बच्चों में थेरेपी के माध्यम से सुधार किया जा सकता है। इस साल इस दिन का थीम ट्रांसफॉर्मिंग द नैरेटिव- कंट्रीब्यूशन्स एट होम, वर्क एट द आर्ट्स एंड पॉलिसी मेकिंग है।
प्रिंसिपल मीनाक्षी मेहता ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के अनुसार विश्व ऑटिज्म दिवस मनाने का उद्देश्य ऑटिस्टिक लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है ताकि वह भी पढ़ लिख सकें और जीवन में आगे बढ़ सकें। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों और लोगों के साथ प्रेम के साथ मिलजुल कर रहना चाहिए। उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। अगर आप उनसे अपनी कोई बात कहना चाहते है तो प्यार से समझाए न कि गुस्सा हो। अगर आपके आप-पास भी कोई इनसे बुरा व्यवहार करें तो उन्हें रोकना चाहिए और ऑटिज्म बच्चों की मदद करनी चाहिए।
Information about autism given to children in DIPS on World Autism Day




