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भारत में दौड़ी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, किराया मात्र 5 रुपए; इस ट्रेन की खासियतें जान उड़ जाएंगे होश

जींद: भारतीय रेलवे ने हरित और आधुनिक परिवहन की दिशा में एक नया इतिहास रच दिया है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-पावर्ड यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक पल के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास हाइड्रोजन तकनीक से संचालित ट्रेन है। जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद ऐसा कारनामा करने वाला भारत अब दुनिया का पांचवां देश बन गया है।

जींद से सोनीपत के बीच करेगी सफर

यह अत्याधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच लगभग 89 किलोमीटर लंबे रूट पर अपनी सेवाएं देगी। गाड़ी संख्या 74010 रोजाना सुबह 7:40 बजे जींद से रवाना होगी और 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। वहीं वापसी में गाड़ी संख्या 74009 सुबह 10:40 बजे सोनीपत से चलेगी और दोपहर 1:00 बजे वापस जींद पहुंच जाएगी। रेलवे की यह परियोजना हरित परिवहन की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम मानी जा रही है।

दुनिया के देशों को भी पीछे छोड़ा

अन्य देशों में जहां अभी केवल दो से चार कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेनें ही चल रही हैं, वहीं भारतीय रेलवे ने सीधे 10 कोच वाला पूरा ट्रेनसेट तैयार करके दुनिया को चौंका दिया है। इस बड़ी ट्रेन में एक साथ करीब 2600 यात्री सफर कर सकेंगे। 3200 हॉर्सपावर के मजबूत प्रोपल्शन सिस्टम से लैस इस ट्रेन की सामान्य रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जबकि जरूरत पड़ने पर यह 110 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड से भी दौड़ सकती है।

डीजल का झंझट खत्म, प्रदूषण होगा जीरो

इस नई तकनीक वाली ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण के अनुकूल होना है। इसमें डीजल का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक के जरिए बिजली पैदा करके चलती है। इसके चलने पर कार्बन उत्सर्जन पूरी तरह से शून्य रहता है और संचालन के दौरान बाहर केवल भाप और हल्की गर्मी ही निकलती है।

किराया इतना कम कि हर कोई कर सकेगा सफर

इतनी हाई-टेक और शानदार होने के बावजूद आम जनता की जेब पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा। रेलवे ने इसका किराया आम आदमी की सहूलियत को देखते हुए बेहद किफायती रखा है। इस आधुनिक ट्रेन में सफर करने के लिए न्यूनतम किराया 5 रुपये और अधिकतम केवल 25 रुपये निर्धारित किया गया है।

हाई-टेक सुरक्षा और आगे की बड़ी तैयारी

यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने पूरी मुस्तैदी दिखाई है। ट्रेन में हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर और ऑटोमैटिक शट-ऑफ सिस्टम जैसे अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। अगर किसी भी तरह की कोई तकनीकी खराबी या गैस का रिसाव होता है, तो सिस्टम तुरंत अपने आप हाइड्रोजन की सप्लाई रोक देगा। इस सफल शुरुआत के बाद रेलवे अपने अनुभव का इस्तेमाल कर भविष्य में कालका-शिमला जैसे मशहूर हेरिटेज रूटों पर भी इसी तरह की हाइड्रोजन ट्रेनें उतारने की योजना बना रहा है।

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