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अमेरिका-कनाडा भूल जाइए! फ्री पढ़ाई और पक्की नौकरी के लिए इस देश में टूट पड़े भारतीय छात्र, टूट गए सारे रिकॉर्ड

नई दिल्ली: अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में वीजा और पीआर (PR) के कड़े नियमों ने विदेश जाने वाले छात्रों की नींद उड़ा दी है। ऐसे में विदेशों में जाकर अपने सुनहरे भविष्य का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों ने अब एक नया और सुरक्षित ठिकाना ढूंढ लिया है। यूरोप का सबसे ताकतवर देश जर्मनी अब इन छात्रों की पहली पसंद बनता जा रहा है। छात्रों का रुझान इस कदर बदला है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में जर्मनी में विदेशी छात्रों की संख्या 4.20 लाख के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को छूने का अनुमान लगाया जा रहा है।

भारत ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, सबसे ज्यादा छात्र पहुंचे जर्मनी

जर्मन अकादमिक विनिमय सेवा और उच्च शिक्षा अनुसंधान केंद्र की एक हालिया रिपोर्ट के आंकड़े काफी हैरान करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024-25 में ही 4.02 लाख से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने जर्मनी के विश्वविद्यालयों में दाखिला लिया था। अब तक के इस सबसे बड़े आंकड़े में 6 फीसदी का भारी उछाल देखने को मिला है। सबसे गर्व और हैरानी की बात यह है कि जर्मनी में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में सबसे बड़ी संख्या अब भारतीयों की हो गई है। फिलहाल वहां करीब 59 हजार भारतीय छात्र अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं, जो कि महज एक साल के भीतर 20 प्रतिशत की बंपर वृद्धि है। कुल विदेशी छात्रों में एक तिहाई (33 प्रतिशत) हिस्सा केवल एशिया-प्रशांत क्षेत्र से है, जिसमें भारत और वियतनाम के छात्र सबसे आगे हैं।

आखिर क्यों जर्मनी पर फिदा हैं छात्र? जानिए असली वजह

छात्रों के इस जबरदस्त माइग्रेशन के पीछे जर्मनी के शानदार नियम और शानदार सुविधाएं मुख्य वजह हैं। दरअसल, जर्मनी के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में शिक्षा लगभग मुफ्त है, जो छात्रों और उनके अभिभावकों का लाखों रुपये बचाता है। वहां छात्रों को ट्यूशन फीस के नाम पर सिर्फ 150 से 250 यूरो प्रति सेमेस्टर का मामूली सा प्रशासनिक शुल्क ही चुकाना पड़ता है। इसके अलावा, वहां पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी तलाशने के लिए 18 महीने का ‘पोस्ट स्टडी वर्क वीजा’ और कई तरह की सरकारी स्कॉलरशिप आसानी से मिल जाती हैं, जो छात्रों के करियर को एक नई उड़ान देती हैं।

वीजा मेलों से और लुभाने की है तैयारी

वीजा और इमीग्रेशन विशेषज्ञ पवन कुमार गुप्ता के मुताबिक, जर्मनी इन दिनों अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने करियर के लिए बेहद आसान और बेहतरीन अवसर प्रदान कर रहा है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि पुरानी आदतों के चलते अभी भी कुछ छात्रों के दिलों में कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया पहली पसंद बने हुए हैं, लेकिन वहां की सख्तियों ने उनके रास्ते मुश्किल कर दिए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले समय में जर्मनी के कॉलेज और विश्वविद्यालय विशेष ‘वीजा मेलों’ के जरिए बड़े पैमाने पर भारतीय छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने की रणनीति बना रहे हैं, जिससे जर्मनी जाने वालों की यह संख्या आने वाले दिनों में और भी आसमान छू सकती है। 

Forget America and Canada! Indian students are flocking to this country for free education