चंडीगढ़: पंजाब सरकार के तमाम दावों और कोशिशों के बावजूद सूबे के खेतों में एक बार फिर से आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है। किसान अगली फसल की तैयारी के लिए धड़ल्ले से गेहूं के अवशेष जला रहे हैं, जिससे राज्य के कई शहरों की आबोहवा तेजी से बिगड़ने लगी है। इस सीजन में अब तक खेतों में आग लगाने के 44 मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने सख्ती दिखाते हुए भारी जुर्माना और एफआईआर दर्ज करने जैसी बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
हवा में घुलने लगा जहर, बिगड़ने लगा एक्यूआई
खेतों में जल रहे गेहूं के अवशेषों का सीधा असर हवा की गुणवत्ता पर दिखने लगा है। प्रदूषण के कारण मंगलवार को मंडी गोबिंदगढ़ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 202 के पार पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इसके अलावा कई अन्य प्रमुख शहर भी प्रदूषण की चपेट में आकर यलो जोन में पहुंच गए हैं। बठिंडा का एक्यूआई 155, अमृतसर का 135 और पटियाला का एक्यूआई 106 दर्ज किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि आग लगने का यह सिलसिला नहीं रुका, तो आने वाले दिनों में हवा और भी खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है।
आसमान से सेटेलाइट की नजर, सामने आ रहे आंकड़े
खेतों में आग की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सरकार 1 अप्रैल से 30 मई तक सेटेलाइट के जरिए कड़ी निगरानी कर रही है। सोमवार को ही आग लगाने के 14 नए मामले दर्ज किए गए। अब तक शहीद भगत सिंह (एसबीएस) नगर में आठ, श्री मुक्तसर साहिब में छह, फिरोजपुर और कपूरथला में पांच-पांच, बरनाला, गुरदासपुर व पटियाला में तीन-तीन, जालंधर व लुधियाना में दो-दो और कई अन्य जिलों में एक-एक मामला सामने आया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले सालों की तुलना में यह आंकड़ा अभी थोड़ा कम है। साल 2025 में इस समय अवधि के दौरान 87 और 2024 में 49 मामले दर्ज किए गए थे।
सरकार का कड़ा एक्शन, दर्ज हो रही ‘रेड एंट्री’
विभिन्न विभागों के अधिकारी फील्ड में जाकर लगातार किसानों को अवशेष जलाने के नुकसान बता रहे हैं, लेकिन जो लोग बाज नहीं आ रहे, उन पर प्रशासन कड़ा एक्शन ले रहा है। पीपीसीबी ने अब तक चार मामलों में बीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है और एक मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत एफआईआर भी दर्ज की है। सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की गई है। इस रेड एंट्री का सीधा मतलब यह है कि संबंधित किसान भविष्य में अपनी वह जमीन न तो किसी को बेच पाएंगे और न ही उसे बैंक में गिरवी रख सकेंगे।
ये जिले बने हुए हैं सबसे बड़े हॉटस्पॉट
पंजाब में करीब 34 लाख हेक्टेयर रकबे पर गेहूं की बुवाई होती है, जिससे लगभग 205 लाख टन भूसा निकलता है। पिछले दो सालों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो कुछ खास जिले खेतों में आग लगाने के मामलों में सबसे बड़े हॉटस्पॉट बने हुए हैं। अमृतसर, गुरदासपुर, लुधियाना, फिरोजपुर, मोगा, बठिंडा, तरनतारन और कपूरथला ऐसे जिले हैं, जहां 2024 और 2025 में अवशेष जलाने के हजारों मामले सामने आए थे। प्रशासन अब इन इलाकों में अपनी गश्त और निगरानी को और भी ज्यादा सख्त कर रहा है।

Fields in Punjab Flare Up Again, Poison Permeates the Air; These Districts Remain the Biggest Hotspots








